विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Jairam Thakur: हिमाचल भाजपा में गुटबाजी पर खुलकर बोले पूर्व CM, सुक्खू सरकार पर निशाना; टैक्स बढ़ाने से विकास नहीं होगा

By Jagran News Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 06 Jan 2026 11:32 AM (IST)

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल सरकार पर कर्ज बढ़ने, विकास रुकने और कर्मचारियों-पेंशनभोगियों के वित्तीय लाभ न मिलने का ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर। जागरण

हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर। जागरण

HighLights

  1. हिमाचल कर्ज के बोझ तले, विकास ठप: जयराम ठाकुर।

  2. स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, हिमकेयर जैसी योजनाएं बंद।

  3. युवाओं को स्थायी रोजगार नहीं, सरकार पर साधा निशाना।

जागरण टीम, धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर का कहना है कि प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है। विकास पर पूर्णविराम लग गया है। कर्मचारियों व पेंशनर्स के वित्तीय लाभ का भुगतान नहीं हो पा रहा है। नौकरियां नहीं मिल रही हैं। हमारी सरकार के समय शुरू हुईं जनहित की योजनाओं को लोग आज भी याद करते हैं। 

हिमाचल को फिर से पटरी पर लाने के लिए कड़े और बड़े फैसले लेने होंगे। जयराम ठाकुर ने दैनिक जागरण के बनोई स्थित प्रेस परिसर में हिमाचल के मुद्दों पर खुलकर बात की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश :

हिमाचल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर आप हमलावर दिखते हैं, सुधार कैसे किया जा सकता है?

प्रदेश का हेल्थ सिस्टम खुद क्रिटिकल हो चुका है। सरकार सिर्फ झूठ के सहारे काम कर रही है। पिछले हफ्ते रामपुर में एक ऐसा मामला सामने आया, जहां एक महिला ढांक से गिर गई और उसे दो अस्पतालों में ले जाया गया। दोनों जगह डाक्टर ही नहीं थे और इलाज के अभाव में उसकी मौत हो गई। हमारी सरकार के समय में अस्पतालों में निश्शुल्क जांच की सुविधा मिलती थी, आज नहीं मिल रही है। जननी सुरक्षा के तहत जो बेहद सस्ती दवाई है और बेहद आवश्यक, वह भी उपलब्ध नहीं है। इमरजेंसी में सीरिंज नहीं मिलने के मामले आए दिन अखबारों में छपते हैं। केंद्र सरकार द्वारा भेजी गई राशि का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। न ही पूरा बजट खर्च हो पा रहा है।

स्वास्थ्य की पूरी व्यवस्था ही आइसीयू में है और जिम्मेदार मस्त हैं। आइजीएमसी शिमला में हुई मारपीट का प्रकरण भी सरकार की नाकामी का उदाहरण है। आपातकाल में लोगों को अस्पताल पहुंचने वाले एंबुलेंस कर्मी हड़ताल पर थे। सरकार ने उनसे बातचीत कर समाधान करने की जहमत तक नहीं उठाई।

हिमकेयर योजना का लोगों को काफी सहारा मिला, वर्तमान में ये योजनाएं कहां हैं और कुछ के बंद होने पर या बदलाव पर क्या कहेंगे?

सरकार की नीयत प्रदेशवासियों का हित करना नहीं है। अपने पहले दिन से ही सरकार ने यह साफ कर दिया था। बिना मंत्रिमंडल के गठन के ही हजारों संस्थानों पर एक झटके में बंद करना, कैसे संभव था? सिर्फ हिमकेयर योजना ही नहीं, सहारा, शगुन, स्वावलंबन जैसी योजनाएं भी बंद कर दी या उनका बजट रोक दिया है। हिमकेयर योजना तो एक सपने के सच होने जैसी थी। जो लोग आयुष्मान से रह गए थे, उन्हें भी इलाज मिले, इसके लिए हमारी सरकार ने हिमकेयर योजना चलाई थी। इस योजना के ऐसे लाभार्थी मुझे मिलते थे, जिन्होंने गरीबी को देखते हुए बीमारी का इलाज न करवाने का मन बना लिया था। कारण था कि उपचार बहुत महंगा था।

इलाज करवाने के लिए गरीब लोगों को कर्ज लेना पड़ता था, जमीन तक बेचनी पड़ती थी। जिंदा बचेंगे या नहीं उसकी कोई गारंटी नहीं थी। लेकिन जब हमारी सरकार के समय में हिम केयर योजना आई तो लोग सिर्फ हिमकेयर का कार्ड बनाने के लिए आते थे और पांच लाख रुपये तक की इलाज निशुल्क करवा कर स्वस्थ्य होकर जाते थे।

आप हिमाचल का पांच वर्ष तक नेतृत्व कर चुके हैं, आज हिमाचल को कहां पाते हैं?

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू कहते हैं कि 2027 तक हिमाचल प्रदेश स्वावलंबी बन जाएगा, ये सब बातें काल्पनिक हैं। हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति इस कद्र खराब हो चुकी है कि अब कर्ज एक लाख करोड़ रुपये पहुंच चुका है। तीन साल में सरकार 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। हमने पांच साल में साढ़े 19 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। प्रदेश में विकास कार्यों पर विराम लग गया है। आज हिमाचल कर्मचारियों का वेतन व पेंशनर्स को पेंशन देने की स्थिति में नहीं है। टैक्स ज्यादा लगाने से प्रदेश के विकास में कोई वृद्धि नहीं होगी। इसके लिए सरकार को कड़े और बड़े फैसले लेने होंगे।

मुख्यमंत्री बार-बार कहते हैं कि हिमाचल भाजपा पांच गुटों में बंटी है, ऐसे में उनकी सरकार के सामने कोई चुनौती नहीं है, क्या कहेंगे? 

(थोड़ा विचार कर) सुक्खू जी के जहन में 24 घंटे राजनीति घूमती रहती है। वह हर वक्त यह सोचते रहते हैं कि किस व्यक्ति को कैसे प्रताड़ित किया जाए। भाजपा के बंटे होने का उनका बयान राजनीतिक है और केवल माहौल बनाने के लिए ऐसा कहते हैं। भाजपा का राष्ट्रीय संगठन इतना मजबूत है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में कोई भी गुट बनाने के बारे में सोच भी नहीं सकता है। हम अगर कांग्रेस की बात करें तो वहां पर अनेक गुट हावी हैं। सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि शीतकालीन सत्र में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ही पांच दिन भाग नहीं लेते हैं, यह सब क्या है उनकी नाराजगी ही तो है। उनकी पार्टी के लोग ही उनकी नहीं सुनते हैं।

Jairam Interview

कांग्रेस के छह विधायक पूर्व में राज्यसभा चुनाव के दौरान टूट चुके हैं, वर्तमान में प्रदेश के हालात देखकर आपको क्या लगता है कि सरकार दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर पाएगी या सत्ता परिवर्तन की संभावना दिखती है?

राजनीति में कुछ भी संभव है। कोर्ट में मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्ति का मामला विचाराधीन है। अगर फैसला आता है तो कुछ भी हो सकता है। सरकार के खिलाफ चारों तरफ नाराजगी है। कर्मचारी, पेंशनर्स यहां तक कि दृष्टिबाधित भी सरकार के खिलाफ धरना देने को मजबूर हो गए हैं। सरकार से कोई भी वर्ग खुश नहीं है।

युवा वर्ग नौकरी की आस में बैठा है और सरकारी क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार के मौके कम हो रहे हैं, इस समस्या से कैसे निपट सकते हैं?

वर्तमान सरकार के समय में वन मित्रों की भर्ती हो चुकी है। अब स्वास्थ्य मित्र या फिर बिजली मित्र आदि की भर्ती कर रही है, यह युवाओं के साथ सरासर धोखा है। यह रोजगार स्थायी नहीं है, केवल भ्रमित करना मात्र है। नाममात्र के मानदेय पर भर्ती करना उचित नहीं है, सरकार को कोशिश करनी चाहिए कि युवाओं को पक्की नौकरी दे। यह मामला हम कई बार उठा भी चुके हैं।

सुबह समाचार पत्र में सबसे पहले अपनी खबर देखते हैं या फिर शांता जी का बयान?

समाचार पत्र में शीर्षक पढ़ते हुए वही खबर पढ़ता हूं जो पठनीय हो। ऐसा नहीं है कि अपनी फोटो देखता हूं। हां, शांता कुमार जी हमारे वरिष्ठ नेता हैं और उनके अनुभव का सम्मान करते हैं। उनसे कोई चिंता नहीं है, न ही उनके कहे पर कोई ज्यादा टिप्पणी करना चाहूंगा।

कांग्रेस सरकार के तीन साल के कार्यक्रम में मंडी में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया था कि कुछ अधिकारी भाजपा नेताओं से रात के अंधेरे में मिल रहे हैं, कहीं उनका इशारा आपकी तरफ तो नहीं था?

सरकार में सब परेशान व त्रस्त हैं। मुख्यमंत्री न मंत्रियों की सुनते हैं न विधायकों की। हालत यह है कि मुख्यमंत्री कुछ चहेते अधिकारियों के अलावा किसी की नहीं सुनते। जिस तीन साल के जश्न की बात आप कर रहे हैं, वह अपने आप में ही सुख की सरकार की नैतिकता पर एक प्रश्न था। जहां, आपदा प्रभावितों के बीच आपदा राहत के पैसे से सरकार जश्न मना रही थी। उस मंच का इस्तेमाल कांग्रेस के सभी नेताओं ने अपने शक्ति प्रदर्शन के लिए किया। एक-दूसरे के खिलाफ खूब जहर उगला और अपनी भड़ास निकाली थी।

यह भी पढ़ें: धर्मशाला के बाद मंडी में रैगिंग, हॉस्टल में पीटा MBBS प्रशिक्षु, दिल्ली और राजस्थान के दोनों छात्रों पर पहले भी लगे थे आरोप

यह भी पढ़ें: दवा उत्पादन का हब हिमाचल अब हथियार बनाएगा, 8 सेक्टर में 10 हजार करोड़ के निवेश का प्रस्ताव; हजारों को मिलेगा रोजगार