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हिमाचल में किसकी सैलरी में लगेगा कितना कट? CM सुक्खू का छह महीने के लिए आधी सैलरी लेने का फैसला

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 21 Mar 2026 04:46 PM (IST)Updated: Sat, 21 Mar 2026 06:34 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति के कारण मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अपने वेतन में 50% कटौती की घोषणा ...और पढ़ें

HighLights

  1. मुख्यमंत्री के वेतन में 50% की कटौती की घोषणा।

  2. मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन भी कटेगा।

  3. आर्थिक स्थिति सुधारने हेतु अस्थायी कटौती का निर्णय।

सुनील शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश की खराब वित्तीय स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अपने चौथे बजट में बड़ा और सख्त फैसला लिया है। राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री के वेतन में 50 प्रतिशत की कटौती करने की घोषणा की है। उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रियों के वेतन में 30 प्रतिशत और विधायकों के वेतन में 20 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला लिया है।

यह कदम प्रदेश की आर्थिक स्थिति को सुधारने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। इसके साथ ही सरकार ने अधिकारियों के वेतन में भी अस्थायी कटौती का निर्णय लिया है। 

इसके अलावा बोर्ड व निगम के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन और सलाहकारों के वेतन में भी 20 प्रतिशत कट लगेगा। 

अफसरों के वेतन में 30 प्रतिशत कटौती

जानकारी के अनुसार आईपीएस, आईएफएस व आईएएस के वेतन में छह माह के लिए 30 प्रतिशत और अन्य अधिकारियों के वेतन में भी 20 प्रतिशत तक की कटौती करने का एलान किया है। सरकार का मानना है कि इस सामूहिक प्रयास से प्रदेश के खजाने पर पड़ रहे दबाव को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।

इसके अलावा चीफ सेक्टरी, एडिशनल चीफ सेक्टरी, प्रिंसिपल सेक्टरी, डीजीपी, एडीजीपी के वेतन से भी 30 फीसदी कट लगाया जाएगा। इसके साथ ही ग्रुप ए और बी अधकारियों के वेतन का 3 प्रतिशत हिस्सा अगले 6 महीनों के लिए कट लगेगा। वहीं, ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों को पूर्णतः इससे बाहर रखा जाएगा और उन्हें पूरा वेतन मिलता रहेगा।

स्थिति में सुधार होने पर वापस होगा वेतन

मुख्यमंत्री ने बजट भाषण के दौरान कहा कि वर्तमान में आर्थिक चुनौतियां गंभीर हैं, ऐसे में सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कटौती अस्थायी है और स्थिति में सुधार होने पर पुनः समीक्षा की जाएगी और काटा हुआ वेतन वापस किया जाएगा।

न्यायपालिका से भी सहयोग का आह्वान

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने न्यायपालिका से भी इस दिशा में सहयोग का आह्वान किया है, ताकि प्रदेश के समग्र विकास और वित्तीय स्थिरता के लिए सभी संस्थाएं मिलकर योगदान दे सकें। विधानसभा अध्यक्ष ने भी वेतन में कटौती की बात कही, जिस पर सीएम ने उनका आभार जताया। 
सरकार के इस फैसले को एक साहसिक और जिम्मेदार कदम माना जा रहा है, जो आम जनता के हित में लिया गया है।

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