Himachal Panchayat Chunav: 31 जनवरी के बाद कौन चलाएगा पंचायत, प्रशासक की तैनाती पर तस्वीर साफ; ...सचिव को जिम्मेदारी
हिमाचल प्रदेश में 3577 पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है। उच्च न्यायालय ने कार्यकाल विस्तार से ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव पर हलचल तेज हो गई है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
3577 पंचायतों का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त।
उच्च न्यायालय ने कार्यकाल विस्तार से किया इनकार।
पंचायत सचिवों को मिलेंगी रूटीन कार्य की शक्तियां।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में 3577 पंचायतों, ब्लाक समितियों और जिला परिषदों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में 31 जनवरी के बाद पंचायत की पॉवर किसके हाथ में होगी। इस पर चर्चा चली हुई है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।
कार्यकाल को लेकर है प्रविधान
इसके आदेश में पैरा 54 में पंचायती राज अधिनियम की धारा 120 को स्पष्ट किया गया है कि पंचायत का कार्यकाल केवल पांच वर्ष होगा। इसका अर्थ है कि पंचायत की पहली बैठक की तिथि से पांच वर्ष पूरे होने के बाद कोई भी पंचायत जारी नहीं रह सकती। इसके अलावा, यह भी प्रविधान है कि पंचायत के गठन के लिए चुनाव निर्धारित अवधि की समाप्ति से पहले और पंचायत के विघटन की तिथि से छह माह की अवधि समाप्त होने से पहले संपन्न होने चाहिए।
प्रशासक के बजाय पंचायत सचिव को शक्तियां सौंपने की तैयारी
प्रशासक तैनात करने को लेकर स्थिति स्पष्ट होती दिख रही है। पंचायत सचिवों को रूटीन कार्य सौंपने पर विचार किया जा रहा है, लेकिन उनके पास वित्तीय शक्तियां नहीं होंगी। यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है, क्योंकि कार्यकाल समाप्त होने के बाद छह माह से कम का ही समय शेष रहेगा। इससे अधिक समय होता तो प्रशासक नियुक्त होते या समितियां गठित होनी थी। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने 30 अप्रैल से पहले चुनाव करवाने का निर्देश दिया है।
कार्यकाल के बाद पंचायत भंग होने का है नियम
पंचायती राज अधिनियम की धारा 128(3) में यह प्रविधान है कि यदि पंचायत का पुनर्गठन निर्धारित अवधि की समाप्ति से पहले नहीं किया जाता है, तो वह भंग हो जाएगी। इस पर धारा 140 लागू होगी, लेकिन अधिकतम छह माह की अवधि के लिए, जिसके भीतर पंचायत का पुनर्गठन इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।
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यह है प्रविधान
धारा 140(3)(ख) में यह प्रविधान है कि पंचायत के पुनर्गठन तक, पंचायत की सभी शक्तियां और कर्तव्य राज्य सरकार या इस संबंध में नियुक्त व्यक्ति या समिति द्वारा निष्पादित किए जाएंगे। भंग की गई पंचायत को उसके विघटन के छह माह के भीतर पुनर्गठित किया जाएगा।
