हिमाचल में ऑफलाइन होंगे 5 लाख तक के टेंडर, आपदा प्रभावित क्षेत्र के लिए सरकार की राहत, रिस्टोरेशन कार्य पकड़ेंगे गति
हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रभावित क्षेत्रों में 5 लाख रुपये तक के रिस्टोरेशन कार्यों के लिए अब सचिवालय की मंजूरी के बिना ऑफलाइन टेंडर हो सकेंगे।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
5 लाख तक के रिस्टोरेशन कार्य अब ऑफलाइन टेंडर से होंगे।
आपदा प्रभावित क्षेत्रों में सड़क निर्माण और विकास कार्यों को गति मिलेगी।
स्थानीय ठेकेदारों को लाभ मिलेगा, काम तेजी से पूरे होंगे।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में जिला उपायुक्तों की रिपोर्ट पर एसडीआरएफ/एनडीआरएफ के तहत स्वीकृत 5 लाख तक के रिस्टोरेशन कार्यों के लिए अब दोबारा सचिवालय की मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी। अधिशासी अभियंता स्तर पर ही 5 लाख रुपये तक के टेंडर ऑफलाइन से स्वीकृत होंगे। ऐसे में प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में रुके पड़े सड़क निर्माण और विकास कार्यों को अब गति मिलेगी।
लटके थे कई कार्य
आपदा में सड़कें-डंगे-पुल टूटने पर भी ठेकेदार पहाड़ी क्षेत्रों में नेटवर्क न होने से ऑनलाइन भर नहीं पाते थे, कई बार सिंगल बिड या नो-बिड की स्थिति में री-टेंडर करना पड़ता था। इसी कारण चंबा, मंडी, कुल्लू, शिमला के सैकड़ों रिस्टोरेशन वर्क लटके थे।
सीधे टेंडर कर सकेंगे अधिकारी
राज्य सरकार ने 5 लाख रुपये तक के कार्यों के लिए ऑफलाइन टेंडर की अनुमति दे दी है। इससे लोक निर्माण विभाग के अधिकारी सीधे टेंडर कर सकेंगे और काम तुरंत शुरू हो पाएगा।
दो से तीन दिन वर्क अवार्ड होगा
ऑफलाइन में 2-3 दिन में नोटिस, कोटेशन और वर्क अवार्ड हो जाएगा। मानसून की भारी वर्षा से ध्वस्त हुई सड़कों की रिटेनिंग वाल, कलवर्ट जैसे छोटे-छोटे काम शीघ्रता से निपट जाएंगे और समय की बचत होगी।
छोटे गांव के लोकल ठेकेदारों को फायदा होगा, जिनके पास डिजिटल सिग्नेचर, लैपटाप नहीं हैं। वे सीधे लोक निर्माण विभाग के डिवीजन में आवेदन कर सकेंगे। यह व्यवस्था फिलहाल आपदा प्रभावित घोषित क्षेत्रों और 2025-26 मानसून आपदा के रिस्टोरेशन कार्यों के लिए विशेष छूट के तौर पर दी गई है, ताकि सड़कों की कनेक्टिविटी बहाल हो और विकास कार्य सर्दी से पहले पूरे हो सकें।
अभी तक की व्यवस्था
लोक निर्माण विभाग में पारदर्शिता के लिए ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली लागू है। 1 लाख रुपये से ऊपर के सभी कार्यों के लिए वेबसाइट पर ऑनलाइन टेंडर अनिवार्य था। अभी तक टेंडर पब्लिश, बिड सबमिशन, टेक्निकल ओपनिंग में 15-21 दिन का समय लगता था।
ऑफलाइन टेंडर रिकॉर्ड भी ऑनलाइन होगा
5 लाख से ऊपर के काम अभी भी ऑनलाइन ही होंगे और ऑफलाइन टेंडर का पूरा रिकॉर्ड और तुलनात्मक विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। प्रदेश सरकार की ओर से दी गई पांच लाख तक की छूट से निविदा प्रक्रिया की लंबी औपचारिकताओं के दृष्टिगत प्रदान की गई है। ऐसा करने से आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों को वाहनों के चलने योग्य किया जा सकेगा।
-एनपी सिंह, इंजीनियर-इन-चीफ लोक निर्माण विभाग।
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