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हिमाचल में आपदा से 3400 करोड़ का नुकसान, केंद्रीय टीम ने दोबारा ब्योरा तैयार करने को कहा; CM बोले- मापदंड बदलें

By Yadvinder Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 01 Oct 2026 06:40 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में मानसून आपदा से हुए 3400 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए केंद्रीय दल ने राज्य ...और पढ़ें

शिमला में सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के साथ बैठक के दौरान केंद्रीय टीम के अधिकारी। जागरण

शिमला में सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के साथ बैठक के दौरान केंद्रीय टीम के अधिकारी। जागरण

HighLights

  1. केंद्रीय दल ने 3400 करोड़ के नुकसान का ब्योरा दोबारा मांगा।

  2. मुख्यमंत्री ने आपदा राहत मापदंडों में बदलाव की मांग की।

  3. सड़कों और पेयजल योजनाओं को सर्वाधिक नुकसान हुआ।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून आपदा से हुए करीब 3400 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई के लिए अब राज्य सरकार को केंद्र के तय मानकों और निर्धारित प्रपत्र के मुताबिक नुकसान का पूरा ब्योरा दोबारा तैयार करना होगा। अंतर-मंत्रालय केंद्रीय दल ने राज्य सरकार से कहा कि नुकसान का मेमोरेंडम निर्धारित फार्मेट में ही प्रस्तुत किया जाए। 

तय प्रारूप के अनुरूप नहीं आने वाले दावों और विवरण का अवलोकन नहीं किया जाएगा। ऐसे में अब दोबारा से निर्धारित फार्मेट में मेमोरेंडम को तैयार कर बनाया जाएगा। 

पहाड़ी राज्यों के मापदंड में हो बदलाव : सीएम 

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केंद्रीय दल के साथ बैठक में हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आपदा राहत के मापदंडों में बदलाव की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी राज्यों की परिस्थितियां मैदानी राज्यों से अलग हैं, इसलिए राहत राशि तय करने के मानक भी अलग होने चाहिएं।

वैज्ञानिक अध्ययन करवाने की जरूरत

उन्होंने केंद्र से प्रदेश की मांग के अनुसार राहत और रिकवरी की राशि जल्द जारी करने का आग्रह किया, क्योंकि पहाड़ों में निर्माण कार्य के लिए काम का मौसम सीमित रहता है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में बादल फटने की बढ़ती घटनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन कराने की जरूरत भी उठाई और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का उल्लेख किया।

केंद्रीय टीम ने 4 दिन दौरा कर लिया जायजा

गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (आपदा प्रबंधन) एम रामचंद्रुडु के नेतृत्व में सात सदस्यीय केंद्रीय दल ने 28 सितंबर से प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का चार दिन तक दौरा कर जमीनी नुकसान का आकलन किया। दल ने चंबा, कांगड़ा, मंडी, कुल्लू, शिमला और सोलन जिलों में पहुंचकर विभिन्न विभागों द्वारा बताए गए नुकसान को मौके पर देखा तथा प्रभावित लोगों, स्थानीय प्रतिनिधियों और अधिकारियों से बातचीत की।

केंद्रीय दल में वित्त, ग्रामीण विकास, सड़क, जल शक्ति और कृषि समेत विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारी तथा राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एसआरसीएस) का प्रतिनिधि शामिल रहे। नुकसान का आकलन केवल एक विभाग के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।

सड़क-पानी को सबसे ज्यादा नुकसान

केंद्रीय दल के प्रमुख एम रामचंद्रुडु ने बताया कि आकलन के दौरान सड़कों और पेयजल योजनाओं को बड़ा नुकसान सामने आया है। इसके अलावा मकानों, कृषि, बागबानी, पशुधन, मत्स्य क्षेत्र और जानमाल के नुकसान की भी जानकारी टीम को मिली है। अंतिम मेमोरेंडम मिलने के बाद दल नुकसान के आंकड़ों और प्रस्तावों का परीक्षण कर केंद्र सरकार को निर्धारित नियमों के अनुसार अपनी सिफारिश देगा।

विशेष सचिव आपदा प्रबंधन पुष्पेंद्र राणा ने बताया कि केंद्रीय दल ने तीन दिनों तक विभिन्न जिलों में मौके पर नुकसान देखा और प्रभावित समुदायों व स्थानीय प्रतिनिधियों से बातचीत की। शिमला में वरिष्ठ सचिवों और विभागाध्यक्षों के साथ बैठक में 3400 करोड़ रुपये के मेमोरेंडम तथा केंद्र से वित्तीय सहायता हासिल करने के तरीकों पर चर्चा हुई।

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