हिमाचल सरकार का हिमकेयर योजना में बड़ा बदलाव, अब 10 लाख तक का सुरक्षा कवच; AI अलर्ट से रुकेगा फ्रॉड
हिमाचल सरकार ने हिमकेयर योजना में बड़ा बदलाव किया है, अब प्रति परिवार स्वास्थ्य सुरक्षा कवच 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
हिमकेयर योजना में स्वास्थ्य सुरक्षा कवच 10 लाख रुपये हुआ।
फर्जीवाड़े रोकने को AI और मशीन लर्निंग का उपयोग।
करीब 10 लाख परिवारों को मिलेगा योजना का लाभ।
यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। लगातार सवालों के घेरे में रही प्रदेश सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य सुरक्षा योजना हिमकेयर (मुख्यमंत्री हिमाचल स्वास्थ्य देखभाल योजना) अब चोला बदल कर नए स्वरूप में सामने आएगी। सरकार ने योजना का सालाना स्वास्थ्य सुरक्षा कवच बढ़ाकर प्रति परिवार 10 लाख रुपये करने का फैसला किया है। इसमें पांच लाख रुपये का बेसिक कवर और पांच लाख रुपये का टाप-अप कवर शामिल होगा। इससे प्रदेश के करीब 10 लाख लाभार्थी परिवारों को लाभ मिलेगा।
योजना में फर्जी अस्पतालों, फर्जी बिलिंग और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले दावों पर रोक लगाने के लिए बीमा कंपनी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित डिजिटल प्लेटफार्म अनिवार्य किया गया है।
रियल टाइम अलर्ट मिलेगा
यह सिस्टम बिना वजह लंबे समय तक मरीज को भर्ती रखने, फर्जी क्लेम, डुप्लीकेट ट्रांजेक्शन तथा अनावश्यक टेस्ट और सर्जरी जैसे पैटर्न की रियल-टाइम पहचान कर अलर्ट जारी करेगा।
10 कंपनियों ने दिखाई रुचि
हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य बीमा योजना सोसायटी ने योजना के लिए नया इंश्योरेंस टेंडर फ्रेमवर्क जारी किया है। इसमें 12 अक्टूबर तक आवेदन किए जा सकेंगे। प्री-बीडिंग बैठक में स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र की 10 कंपनियों ने रुचि दिखाई है। पात्र कंपनियों में सबसे कम प्रीमियम (एल-1) की बोली लगाने वाली कंपनी को योजना के संचालन का तीन वर्ष का ठेका मिलेगा।
एम्पेनल्ड सरकारी और निजी अस्पतालों में लाभार्थियों को कैशलेस उपचार मिलेगा। प्रदेश के बाहर के एम्पेनल्ड अस्पतालों में भी भर्ती से पहले और बाद के निर्धारित खर्चों का लाभ जारी रहेगा।
हिमकेयर: पहले क्या था, अब क्या बदला?
- सुरक्षा कवच: पहले पांच लाख रुपये प्रति परिवार प्रति वर्ष था; अब 10 लाख रुपये (5 लाख बेसिक + 5 लाख आप-अप)।
- लाभार्थी : पहले आठ लाख कार्ड बने थे, जिनमें से अभी 3.32 लाख एक्टिव हैं, अब करीब 10 लाख परिवारों को शामिल करने का लक्ष्य।
- बीमा कंपनी का अनुबंध: नई व्यवस्था में पात्र कंपनी को तीन वर्ष का अनुबंध, पहले एक वर्ष था।
- फर्जीवाड़े पर निगरानी: पहले की व्यवस्था की तुलना में अब एआइ और मशीन लर्निंग आधारित डिजिटल निगरानी अनिवार्य।
- पंजीकरण: पहले की तरह इस इसमें भी मार्च, जून, सितंबर और दिसंबर में होगा।
- प्रीमियम : पहले आम लोगों के लिए वर्ष का 1000 रुपये व कुछ श्रेणियों में निश्शुल्क व 365 रुपये था। नई व्यवस्था में तय होना है।
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