हिमाचल की पंचायतें 16वें वित्त आयोग के फंड से खरीद सकेंगी तीन लाख तक का फर्नीचर, नियम और शर्तें तय
पंचायती राज विभाग ने हिमाचल की पंचायतों को 16वें वित्त आयोग की अनटाइड ग्रांट से तीन लाख रुपये तक का कार्यालय फर्नीचर खरीदने की स्वीकृति दी है।

हिमाचल प्रदेश में पंचायतें 3 लाख तक का फर्नीचर खरीद सकेंगी। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
16वें वित्त आयोग से पंचायतों को फर्नीचर खरीद की स्वीकृति।
अधिकतम तीन लाख रुपये तक का फर्नीचर खरीद सकेंगी पंचायतें।
खरीद प्रक्रिया में सरकारी नियमों का पालन करना अनिवार्य।
संवाद सहयोगी, जसवां परागपुर (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में पंचायतों को 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली मूल अनुदान राशि यानी अनटाइड ग्रांट के उपयोग को लेकर पंचायती राज विभाग ने महत्वपूर्ण स्वीकृति जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंचायतें इस अनुदान से अधिकतम तीन लाख रुपये तक का कार्यालय फर्नीचर खरीद सकती हैं। इस संबंध में पंचायती राज विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जिला पंचायत अधिकारियों तथा खंड विकास अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि 16वें वित्त आयोग के अनुदान के अंतर्गत ग्राम पंचायतों को कार्यालय उपयोग के लिए फर्नीचर खरीदने की अनुमति दी गई है। इसके लिए अधिकतम तीन लाख रुपये की राशि अनटाइड ग्रांट से खर्च की जा सकती है।
शर्तों व प्रक्रिया का करना होगा पालन
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि फर्नीचर की खरीद निर्धारित सीमा के भीतर ही की जानी होगी और खरीद प्रक्रिया में सभी आवश्यक सरकारी औपचारिकताओं का पालन करना अनिवार्य रहेगा। ग्राम पंचायतों को खरीद करते समय हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (वित्त, बजट, लेखे, लेखा परीक्षा, कार्य, कराधान एवं भत्ते) नियम, 2002 में निर्धारित प्रावधानों, शर्तों और प्रक्रिया का पालन करना होगा।
पत्र में प्रदेश के सभी जिला पंचायत अधिकारियों से कहा गया है कि इस स्वीकृति की जानकारी उनके संबंधित जिलों की सभी ग्राम पंचायतों तक पहुंचाई जाए, ताकि पंचायतें नियमों के अनुरूप कार्यालय फर्नीचर की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकें।
पत्र देरी से जारी होने से असमंजस
अधिकांश पंचायतों ने 16वें वित्त आयोग के अंतर्गत किए जाने वाले विकास कार्यों का प्लान पोर्टल पर अपलोड कर दिया है और पत्र देरी से जारी होने के कारण अब इसमें बदलाव करना पंचायतों के लिए कठिन कार्य हो गया है। जिला पंचायत अधिकारी कांगड़ा सचिन ठाकुर ने निदेशालय से जारी हुए दिशा निर्देशों की पुष्टि की है।
