पुनर्वास के इंतजार में आर्थिक तंगी में पौंग बांध विस्थापित, सरकार से झील किनारे खेती की मांगी अनुमति
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में पौंग बांध के विस्थापितों ने पुनर्वास पूरा होने तक पौंग झील के खाली क्षेत्र में फसल बिजाई की अनुमति मांगी है।

पौंग बांध विस्थापितों ने झील किनारे खेती की अनुमति मांगी है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
विस्थापितों ने पौंग झील के खाली क्षेत्र में खेती की अनुमति मांगी।
पुनर्वास में देरी से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं कई परिवार।
विधायक के माध्यम से सरकार तक अपनी बात पहुंचाएंगे विस्थापित।
संवाद सूत्र, नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में जिला कांगड़ा के पौंग बांध विस्थापितों ने पुनर्वास पूरा होने तक पौंग झील के खाली क्षेत्र में फसल बिजाई की अनुमति देने की मांग उठाई है। इस मुद्दे को लेकर विस्थापितों ने एक गुप्त बैठक कर आगामी रणनीति तैयार की। बैठक की अध्यक्षता विस्थापित शेर सिंह ने की, जिसमें सैकड़ों विस्थापितों के शामिल होने की बात सामने आई है।
विधायक के माध्यम से सरकार से उठाएंगे मसला
बैठक में विस्थापितों ने निर्णय लिया कि वे जल्द ही देहरा की विधायक कमलेश ठाकुर से मुलाकात कर अपनी मांग सरकार के समक्ष रखने का आग्रह करेंगे। विस्थापितों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों का पूर्ण पुनर्वास नहीं हो जाता, तब तक पौंग झील के खाली क्षेत्र में सीमित रूप से फसल बिजाई की अनुमति दी जानी चाहिए।
पुनर्वास में देरी से परेशान परिवार
विस्थापितों ने कहा कि पुनर्वास में लंबें समय से हो रही देरी के कारण अनेक परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में झील का जलस्तर कम होने पर खाली रहने वाली जमीन पर खेती की अनुमति मिलने से उन्हें अस्थायी रूप से आजीविका का सहारा मिल सकता है।
पर्यावरणीय पहलू पर भी चर्चा
बैठक में इस मांग के पर्यावरणीय पहलू पर भी चर्चा हुई। विस्थापितों का तर्क है कि अक्टूबर से मार्च के बीच पौंग झील में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। उनका मानना है कि सीमित क्षेत्र में फसल होने से पक्षियों के लिए वनस्पति और खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सकती है।
आजीविका का वैकल्पिक आधार मिले
विस्थापितों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग सरकार से टकराव की नहीं, बल्कि पुनर्वास होने तक आजीविका का वैकल्पिक आधार उपलब्ध कराने की है। अब विधायक से मुलाकात के बाद इस मांग को सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाने की तैयारी है।
