HRTC हिम बस कार्ड पांच साल की अवधि के लिए किया जा सकता है जारी, सालाना रिन्युअल पर हिमाचल हाई कोर्ट की टिप्पणी
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने दिव्यांगों के हिम बस कार्ड के सालाना रिन्युअल की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने के निर्देश ...और पढ़ें

हिमाचल हाई कोर्ट ने हिम बस कार्ड रिन्युअल को लेकर निर्देश दिए हैं। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने हिम बस कार्ड सालाना रिन्युअल पर पुनर्विचार को कहा।
दिव्यांगों की परेशानी कम करने हेतु पांच साल वैधता पर समीक्षा।
अगली सुनवाई 23 नवंबर को, अधिकारी पेश करेंगे समीक्षा रिपोर्ट।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने दिव्यांगों के लिए हिम बस कार्ड के सालाना रिन्युअल की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सक्षम अधिकारियों से कहा है कि वे इस बात की समीक्षा करें कि क्या इस कार्ड को सालाना रिन्यू करने के बजाय एक बार में पांच साल की अवधि के लिए जारी किया जा सकता है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने शोभू राम गर्ग द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद दिया।
सालाना रिन्युअल प्रक्रिया से दिव्यांगों को परेशानी
याचिकाकर्ता की ओर से दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 के नियम 19 और 20 का हवाला देते हुए कहा कि दिव्यांगता प्रमाणपत्र की वैधता के दौरान मिलने वाली सुविधाएं जारी रहनी चाहिए। कोर्ट को बताया कि सालाना रिन्युअल प्रक्रिया के कारण दिव्यांगों, खासकर नेत्रहीनों को काफी परेशान होना पड़ता है। याचिकाकर्ता की मांग है कि जब तक दिव्यांगता प्रमाणपत्र वैध है, तब तक कार्ड रिन्युअल की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए।
एचआरटीसी ने रखा पक्ष
हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम ने दलील दी कि यात्रियों के डाटा को ट्रैक और व्यवस्थित करने के लिए एक साफ्टवेयर सिस्टम बनाया है। सभी निर्दिष्ट श्रेणियों के लिए यह कार्ड अनिवार्य है। किसी भी एक श्रेणी को इससे छूट देने से डाटा को संकलित करने में दिक्कत आएगी।
दिव्यांगता प्रमाणपत्र केवल स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर के तहत निश्शुल्क यात्रा का लाभ उठाने के लिए श्रेणी चुनने का अधिकार देता है। मामले की सुनवाई 23 नवंबर को होगी। इसमें सक्षम प्राधिकारियों को अपनी समीक्षा रिपोर्ट पेश करनी होगी।
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