विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'सरकारी कर्मचारियों को ट्रेनी बनाने की नीति असंवैधानिक', हिमाचल हाई कोर्ट ने कहा- अनुबंध आधार पर माना जाए

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 03 Oct 2026 01:16 PM (IST)Updated: Sat, 03 Oct 2026 02:17 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को ट्रेनी नियुक्त करने की नीति को असंवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. सरकारी कर्मचारियों को ट्रेनी बनाने की नीति असंवैधानिक घोषित।

  2. भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते।

  3. याचिकाकर्ता डॉक्टरों को अनुबंध आधार पर माना जाए, लाभ मिलें।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के सरकारी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2024 के तहत कर्मचारियों को ट्रेनी के रूप में नियुक्त करने की नीति को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते। यह फैसला न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने साहिल ठाकुर, चार्वी गुप्ता और अरुणिका ठाकुर सहित अन्य डॉक्टर्स द्वारा दायर विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुनाया।

हाई कोर्ट ने कहा, 2024 के जिस कर्मचारी अधिनियम के आधार पर डाक्टरों को ट्रेनी बनाया था, उसे अदालत (देविंदर कुमार केस) पहले ही असंवैधानिक घोषित कर खारिज कर चुकी है।

सभी को अनुबंध आधार पर माना जाए

कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी याचिकाकर्ता डॉक्टर्स को वर्ष 2012 के भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत अनुबंध आधार पर नियुक्त माना जाए। उन्हें वे सभी वित्तीय और सेवा लाभ दिए जाएं, जो अन्य अनुबंध कर्मचारियों को मिलते हैं। सरकार ने एक कटआफ डेट 19 जुलाई 2025 तय कर इन डाक्टरों को पीजी करने के इन सर्विस लाभ से बाहर कर दिया था। 

कोर्ट ने इस पाबंदी को हटाते हुए आदेश दिया कि डाक्टरों को जनरल ड्यूटी आफिसर के रूप में पीजी और सुपर स्पेशियलिटी कोर्स के लिए पात्र माना जाए।

नियुक्ति की शुरुआती तारीख से लाभ पाने के हकदार

कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता डाक्टर अपनी नियुक्ति की शुरुआती तारीख से ही नान प्रैक्टिसिंग अलाउंस और अनुबंध नियुक्ति से जुड़े सभी लाभ पाने के हकदार हैं। जब विज्ञापन अनुबंध के आधार पर भर्ती के लिए निकाला था, तो चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकार किसी भी उम्मीदवार को दूसरे प्रशासनिक आदेश के जरिए ट्रेनी बनने के लिए मजबूर नहीं कर सकती।

यह है मामला

स्वास्थ्य विभाग ने वर्ष 2024 में प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से मेडिकल अफसरों (जनरल विंग) के 200 पदों के लिए अनुबंध आधार पर आवेदन मांगे थे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगस्त 2025 में मेरिट सूची जारी की, जिसमें याचिकाकर्ता डाक्टर सफल रहे, लेकिन इस बीच राज्य सरकार ने नया कानून और गाइडलाइंस जारी कर दीं। इसके तहत सरकार ने चयनित डाक्टरों को अनुबंध या नियमित नियुक्ति देने के बजाय जाब ट्रेनी (ट्रेनी मेडिकल आफिसर) के रूप में ज्वाइन करने और एक ट्रेनी एग्रीमेंट साइन करने पर मजबूर कर दिया। ट्रेनी का ठप्पा लगने के कारण इन डाक्टरों को उच्च शिक्षा नीतियों के लाभ से बाहर कर दिया और उनका नान प्रैक्टिसिंग अलाउंस भी रोक दिया। इसके खिलाफ डाक्टरों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

यह भी पढ़ें: राष्ट्रपति के हिमाचल दौरे में बदलाव, अब श्री नयनादेवी मंदिर नहीं सीधे एम्स आएंगी द्रौपदी मुर्मु; ट्रैफिक डायवर्ट होगा