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हिमाचल में माइनिंग फंड के दुरुपयोग व प्रभावित क्षेत्र की अनदेखी पर हाई कोर्ट सख्त, केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 08 Oct 2026 04:28 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने माइनिंग फंड के कथित दुरुपयोग और प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी पर राज्य व केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने माइनिंग फंड दुरुपयोग पर सरकार को नोटिस दिया।

  2. 'श्री पांवटा साहिब विकास मंच' ने जनहित याचिका दायर की थी।

  3. फंड से अधिकारियों के लिए नए वाहन खरीदने का आरोप।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने माइनिंग फंड (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट) के पैसों के कथित दुरुपयोग और प्रभावित क्षेत्रों की अनदेखी को लेकर राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने 'श्री पांवटा साहिब विकास मंच' की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर 2026 तय की है और प्रतिवादियों को तब तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। 

याचिकाकर्ता के अनुसार, डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (संशोधित) नियम, 2016 के तहत इस फंड का मुख्य उद्देश्य खनन और उससे जुड़ी गतिविधियों से प्रतिकूल रूप से प्रभावित लोगों और क्षेत्रों के हितों के लिए काम करना है। नियम 13 में स्पष्ट रूप से तय है कि यह पैसा किन मदों में खर्च किया जाना चाहिए। 

5 करोड़ राजस्व जुटाया पर क्षेत्र को 25 प्रतिशत भी नहीं मिला

याचिका में आरोप लगाया गया है कि अकेले बनोर पंचायत ने पिछले 10 वर्षों के दौरान लगभग ₹5 करोड़ का डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट राजस्व जनरेट किया है। लेकिन इसके बदले में इस क्षेत्र को इस राशि का 25% हिस्सा भी नहीं मिला और विकास के नाम पर केवल ₹15 लाख के दो कार्य ही स्वीकृत किए गए।

गाड़ियां होने के बावजूद अफसरों ने खरीद लिए नए वाहन

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि नियमों को ताक पर रखकर डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट की प्रबंध समिति ने डिप्टी कमिश्नर सिरमौर और माइनिंग ऑफिसर नाहन के कार्यालयी उपयोग के लिए दो वाहन खरीदे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन दोनों अधिकारियों के पास पहले से ही सरकारी गाड़ियां मौजूद हैं, और अब इन नई गाड़ियों के रखरखाव और आवर्ती खर्चे भी इसी ट्रस्ट फंड से भुगताए जा रहे हैं।

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