'लड़कों के साथ पढ़ने से नहीं घटती लड़कियों की सुरक्षा', भरमौर में को-एजुकेशन स्कूल को HC ने दी हरी झंडी
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने भरमौर में गर्ल्स स्कूल के सह-शिक्षा स्कूल में विलय को सही ठहराया है। कोर्ट ने ...और पढ़ें
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भरमौर गर्ल्स स्कूल विलय पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला।
HighLights
भरमौर गर्ल्स स्कूल का सह-शिक्षा स्कूल में विलय सही
सह-शिक्षा से लड़कियों की सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं
छात्राओं के लिए सुविधाओं हेतु कड़े निर्देश जारी किए
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने चंबा जिले के भरमौर में राजकीय गर्ल्स स्कूल के सह शिक्षा स्कूल में विलय को सही ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि को-एजुकेशन स्कूल में पढ़ने से लड़कियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होता, बल्कि यह उनके समग्र विकास और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए जरूरी है।
न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने भरमौर निवासी अनिल कुमार द्वारा दायर याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया।
अदालत ने सरकार की 18 फरवरी 2026 की स्कूल विलय की अधिसूचना को रद करने से इन्कार कर दिया, लेकिन छात्राओं की सुविधाओं को लेकर शिक्षा विभाग को कड़े निर्देश जारी किए हैं।
सरकार ने कोर्ट को बताया कि विलय के बाद अब दोनों स्कूलों के इंफ्रास्ट्रक्चर व शिक्षकों का लाभ बच्चों को मिलेगा। याचिकाकर्ता की इस दलील को कोर्ट ने खारिज कर दिया कि सह-शिक्षा से लड़कियों की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी।
कोर्ट ने कहा कि सह-शिक्षा संस्थान अधिक समावेशी और संतुलित माहौल प्रदान करते हैं। याचिकाकर्ता की चिंता पर सहमति जताते हुए कोर्ट ने शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि स्कूल में छात्राओं व छात्रों के लिए अलग-अलग कम से कम 20-20 शौचालय बनाए जाएं, जो एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी पर हों।
महिला व पुरुष स्टाफ के लिए भी पांच-पांच या अधिक विशेष शौचालयों की व्यवस्था की जाए। हाई कोर्ट ने अधिकारियों को डा. जया ठाकुर बनाम भारत सरकार (2026) मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए निर्देशों का पालन करने को कहा है।
इसके तहत स्कूलों में छात्राओं को निश्शुल्क सेनेटरी नैपकिन देना, स्कूलों में मेन्स्ट्रुअल हाइजीन मैनेजमेंट कार्नर स्थापित करना और सेनेटरी कचरे के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।
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