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शिमला में एंटी हेलगन पर हाईकोर्ट की रोक, हिमाचल सरकार से मांगा जवाब

Published: Tue, 06 Oct 2026 08:15 AM (IST)

हिमाचल हाईकोर्ट ने शिमला जिले के जुब्बल और कोटखाई में एंटी हेलगन के इस्तेमाल पर एक साल के लिए रोक ...और पढ़ें

जुब्बल-कोटखाई में एंटी हेलगन पर एक साल के लिए बैन।

जुब्बल-कोटखाई में एंटी हेलगन पर एक साल के लिए बैन।


HighLights

  1. शिमला के जुब्बल-कोटखाई में एंटी हेलगन पर एक साल का बैन

  2. पड़ोसी इलाकों में ओलावृष्टि, भारी बारिश की शिकायतों पर रोक

  3. हाईकोर्ट ने हिमाचल सरकार और नौणी यूनिवर्सिटी से रिपोर्ट मांगी

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल हाई कोर्ट ने शिमला जिले के जुब्बल और कोटखाई में सरकारी व निजी एंटी हेलगन (ओलारोधक बंदूक) के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने यह आदेश जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। हाई कोर्ट में दाखिल शिकायतों और रिपोर्ट में चिंता जताई थी कि एंटी हेलगन चलने से बादल दूसरे क्षेत्रों की तरफ चले जाते हैं।

इससे साथ लगते पड़ोसी इलाकों में अत्यधिक वर्षा के साथ ओलावृष्टि होने से बागवानों को नुकसान उठाना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि जब तक इस मामले की पूरी रिपोर्ट नहीं आ जाती तब तक कम से कम एक वर्ष के लिए एंटी हेलगन का इस्तेमाल रोक दिया जाए।

एंटी हेलगन बंद करने से हुआ है लाभ

कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी रिपोर्ट मांगी है कि क्या इन गन को बंद करने से आसपास के इलाकों (देवरीघाट और बड़ौनघाट के नजदीक) को कोई लाभ हुआ है या नहीं। निदेशक बागवानी द्वारा दायर शपथपत्र से भी यह साफ हुआ कि जब एक घंटे से अधिक समय तक यह हेल कंट्रोल सिस्टम चलाया तो उस दौरान भारी वर्षा दर्ज की गई।

इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने माना कि एंटी हेलगन के कारण नुकसान की आशंका सच साबित होती दिख रही है। वर्तमान में डा. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी इस तकनीक पर अध्ययन कर रहा है, जिसे पूरा होने में अभी चार वर्ष लगेंगे।

हाई कोर्ट ने यूनिवर्सिटी से मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने नौणी यूनिवर्सिटी को भी प्रतिवादी बनाकर रजिस्ट्रार के माध्यम से नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। अदालत को दी गई शिकायत में मेक्सिको, रोमानिया और अन्य देशों में एंटी-हेलगन के पड़ने वाले दुष्प्रभावों का भी हवाला दिया गया था।

इस पर हाई कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह इन सभी अंतरराष्ट्रीय पहलुओं और प्रभावों का अध्ययन कर एक व्यापक व विस्तृत जवाब कोर्ट में दाखिल करे। मामले की अगली सुनवाई अब आठ दिसंबर को होगी।

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