'भारत में जन्मे व्यक्ति को यहां की नागरिकता का अधिकार', हिमाचल हाई कोर्ट का फैसला; महिला को पासपोर्ट देने का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें कहा गया है कि ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 3 पर महत्वपूर्ण फैसला।
1950-1987 के बीच जन्मे व्यक्ति जन्म से भारतीय नागरिक।
पुलिस रिपोर्ट खारिज, महिला को पासपोर्ट जारी करने का आदेश।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने नागरिकता और पासपोर्ट नियमों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3 के तहत, 26 जनवरी 1950 और 1 जुलाई 1987 के बीच भारत की सीमा के भीतर जन्म लेने वाला हर व्यक्ति कानूनी तौर पर भारत का नागरिक है। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने मनाली की एक महिला शीतला देवी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
पुलिस रिपोर्ट को किया दरकिनार
कोर्ट ने पुलिस की उस प्रतिकूल रिपोर्ट को दरकिनार कर दिया, जिसमें महिला को 'नेपाली नागरिक' बताकर उसका पासपोर्ट आवेदन रोक दिया गया था। याचिकाकर्ता शीतला देवी ने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था।
मूल रूप से नेपाल निवासी
पुलिस वैरिफिकेशन के दौरान स्थानीय प्रशासन (एसडीएम और तहसीलदार) ने ग्राम पंचायत के हवाले से रिपोर्ट दी कि महिला और उसका बेटा मूल रूप से नेपाल के निवासी हैं और मनाली के पतलीकूहल में किरायेदार के रूप में रह रहे हैं। इस प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट के आधार पर शिमला स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने महिला को पासपोर्ट जारी करने से मना कर दिया था।
जन्म प्रमाणपत्र में बताया था भारतीय नागरिक
इसके विपरीत, महिला के पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध जन्म प्रमाण पत्र था, जिसके अनुसार उसका जन्म 3 मई 1972 को पतलीकूहल (मनाली), कुल्लू में हुआ था। साथ ही, पुलिस की एक अन्य जांच रिपोर्ट में पंचायत प्रधान ने उसे भारतीय नागरिक ही बताया था। प्रशासनिक रिपोर्टों में इस विरोधाभास के बाद महिला ने न्याय के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाई कोर्ट ने क्या कहा
हाई कोर्ट ने नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 3(1)(a) का हवाला देते हुए कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता का जन्म 3 मई 1972 को भारत के क्षेत्र में हुआ था, इसलिए वह हर लिहाज से जन्म से भारत की नागरिक है। ऐसे में उसे विदेशी या नेपाली नागरिक मानकर पासपोर्ट देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट विभाग ने पुलिस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की, इसलिए उनकी कोई गलती नहीं है, लेकिन राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को अपनी भूल सुधारनी होगी।
सरकार और पुलिस को आदेश
हाई कोर्ट ने याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और पुलिस को आदेश दिया है कि वे नागरिकता अधिनियम की धारा 3 को ध्यान में रखते हुए दो सप्ताह के भीतर महिला की नई और सकारात्मक पुलिस वैरिफिकेशन रिपोर्ट जारी करें। इसके बाद पासपोर्ट कार्यालय को कानून के तहत जल्द से जल्द महिला का पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अदालत के इस फैसले से साफ हो गया है कि यदि किसी व्यक्ति का जन्म तय समय-सीमा के भीतर भारत में हुआ है और उसका वैध रिकॉर्ड है, तो प्रशासनिक रिपोर्टों की विसंगतियों के आधार पर उसकी भारतीय नागरिकता को चुनौती नहीं दी जा सकती।
