'पति के चरित्र पर झूठे आरोप और अधिकारियों से शिकायत करना क्रूरता', हिमाचल हाई कोर्ट ने पत्नी की अपील खारिज की
हिमाचल हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति के चरित्र पर बेबुनियाद आरोप लगाना और सैन्य अधिकारियों से शिकायत ...और पढ़ें

हिमाचल हाई कोर्ट ने पति के चरित्र पर लगाए आरोपों के मामले में पत्नी की याचिका खारिज कर दी। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
पति के चरित्र पर बेबुनियाद आरोप मानसिक क्रूरता के दायरे में।
सैन्य अधिकारियों से शिकायत करना भी मानसिक क्रूरता माना गया।
हाई कोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक का फैसला बरकरार रखा।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पत्नी द्वारा पति के चरित्र पर बेबुनियाद आरोप लगाना और उसके सैन्य अधिकारियों से शिकायत करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आता है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने इस आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए तलाक के फैसले को सही ठहराया और पत्नी की अपील को खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सशस्त्र बल (सेना) एक सख्त अनुशासन, उच्च नैतिक मानकों और आचार संहिता पर काम करते हैं।
ऐसी स्थिति में यदि कोई महिला अपने जीवनसाथी के खिलाफ वरिष्ठ अधिकारियों को अनैतिक व्यवहार या अवैध संबंधों की लिखित शिकायतें भेजती है तो यह महज साधारण घरेलू विवाद नहीं रह जाता। यह कदम कार्यस्थल पर उस व्यक्ति की प्रतिष्ठा, सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाता है।
2002 में हुई शादी
दोनों का विवाह साल 2002 में हुआ था और उनके दो बच्चे हैं। शादी के कुछ साल बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगा और वे 2011 से अलग रह रहे थे।
वफादारी पर कीचड़ उछालना रिश्ते की बुनियाद कर देता है खत्म
कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी की वफादारी पर बिना किसी ठोस सुबूत के कीचड़ उछालना और उसके सहकर्मियों व वरिष्ठों के सामने उसकी छवि खराब करना वैवाहिक रिश्ते की बुनियाद को खत्म कर देता है। ऐसे में पीड़ित पक्ष से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह इस अपमान को सहकर साथ रहे।
