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हिमाचल में बढ़ने लगा इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज, पेट्रोल-डीजल खर्च से राहत के साथ मिल रही भारी छूट

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 13 Sep 2026 06:40 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और सरकारी छूट के कारण इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता बढ़ रही है। सरकार ...और पढ़ें

हिमाचल में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज बढ़ रहा है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज बढ़ रहा है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. हिमाचल में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से ई-वाहनों का क्रेज।

  2. पंजीकरण शुल्क, परमिट, टोकन टैक्स में 100% छूट मिल रही।

  3. पिछले तीन वर्षों में 6248 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए हैं।

राज्य ब्यूरो, शिमला। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच हिमाचल में इलेक्ट्रिक वाहनों (ई-वाहन) का क्रेज बढ़ने लगा है। कम संचालन खर्च और सरकार की ओर से पंजीकरण शुल्क, परमिट व टोकन टैक्स में 100 प्रतिशत छूट से लोग ई-वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में प्रदेश में 6248 ई-वाहन पंजीकृत हुए हैं। इनमें 2829 दोपहिया, 1528 मोटर कार और 252 यात्री थ्री-व्हीलर शामिल हैं। 

हालांकि, इसी अवधि में कुल 4,91,285 नए वाहन पंजीकृत हुए हैं। लिहाजा कुल वाहनों की तुलना में ई-वाहनों की संख्या अभी कम है, लेकिन इनके प्रति बढ़ता भरोसा बदलाव का संकेत दे रहा है।

कई शुल्क में मिलती है पूरी छूट

ई-वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार पंजीकरण शुल्क, परमिट और टोकन टैक्स में 100 प्रतिशत छूट दे रही है। विशेष पथकर में भी 50 प्रतिशत राहत का प्रविधान है। इससे खरीद की शुरुआती लागत के साथ संचालन खर्च में भी बचत हो रही है। सरकार ई-वाहनों के लिए चार्जिंग ढांचा विकसित करने पर भी जोर दे रही है। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर ई-चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। चार्जिंग सुविधा बढ़ने से आने वाले समय में ई-वाहनों की संख्या में और इजाफे की उम्मीद है।

25 लाख वाहन, बढ़ने लगा दबाव

प्रदेश में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2016 में 12,37,128 वाहन थे, जो 2022 में बढ़कर 21,06,438 हो गए। वर्ष 2026 तक इनकी संख्या करीब 25 लाख पहुंच गई है। प्रदेश में करीब 43 हजार किलोमीटर सड़क नेटवर्क है और 3644 गांव सड़क सुविधा से जुड़ चुके हैं। बढ़ते सड़क संपर्क के साथ वाहनों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। 

ऐसे में ई-वाहनों का बढ़ता चलन प्रदूषण कम करने के साथ सड़कों पर बढ़ते यातायात दबाव के बीच एक महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।

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