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कहीं पर ड्यूटी, कहीं वेतन और रिकॉर्ड में नाम तक नहीं, हिमाचल में डेपुटेशन का खेल खत्म; अब DDO की मुहर निर्णायक

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 22 Sep 2026 06:40 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश में डेपुटेशन का खेल खत्म, हाईकोर्ट के आदेश से सभी डेपुटेशन रद्द कर दिए गए हैं। अब कर्मचारियों ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हिमाचल में हाईकोर्ट के आदेश से सभी डेपुटेशन रद्द हुए।

  2. कर्मचारी अब अपनी मूल तैनाती वाले स्थानों पर लौटेंगे।

  3. वेतन के लिए डीडीओ को वास्तविक ड्यूटी प्रमाणित करनी होगी।

राज्य ब्यूरो, शिमला। दुर्गम क्षेत्र में तबादला हुआ नहीं कि डेपुटेशन का रास्ता खुल जाता था। राजनीतिक पहुंच और विभागीय व्यवस्था के सहारे कर्मचारी हार्ड व जनजातीय क्षेत्रों में जाने के बजाय शहरों के आसपास या निदेशालयों में तैनाती हासिल कर लेते थे। ड्यूटी कहीं और होती थी और वेतन किसी दूसरी जगह से बनता था। कई मामलों में डेपुटेशन का पूरा विवरण सर्विस रिकार्ड में दर्ज तक नहीं होता था। 

यानी जिस कर्मचारी ने हार्ड या ट्राइबल एरिया में कदम तक नहीं रखा, उसकी सेवा को वहां की निर्धारित अवधि में गिना जाता रहा। अब इस व्यवस्था पर पूरी तरह ब्रेक लग गया है।

हाई कोर्ट के आदेश के बाद सभी डेपुटेशन रद

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के बाद कार्मिक विभाग ने सभी तरह के डेपुटेशन रद्द कर दिए हैं। कार्मिक विभाग के आदेशों के बाद सोमवार से संबंधित कर्मचारियों ने अपने मूल तैनाती वाले स्थानों पर ज्वाइनिंग देना भी शुरू कर दिया है। 

शिक्षा निदेशालय से 20 कर्मचारी मूल तैनाती पर भेजे

सबसे अधिक डेपुटेशन शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में होने की बात सामने आई है। स्कूल शिक्षा निदेशालय शिमला में ही डेपुटेशन पर लंबे समय से डटे करीब 20 के करीब कर्मचारियों को एक साथ उनके मूल तैनाती वाले स्थानों के लिए रवाना कर दिया गया।

डेपुटेशन से मिली राहत अब मूल जगह पर करनी होगी ड्यूटी

डेपुटेशन खत्म होने का सीधा असर उन स्कूलों और कार्यालयों पर पड़ेगा, जहां वर्षों से कर्मचारी कम थे। खासकर हार्ड और जनजातीय क्षेत्रों में खाली पड़े पदों पर अब मूल तैनाती वाले कर्मचारी पहुंचेंगे। इससे वहां लंबे समय से प्रभावित हो रही सेवाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है। 

शिक्षा निदेशालय से एक साथ बीस से अधिक कर्मचारियों की वापसी के बाद वहां भी व्यवस्था बदल गई है। जिन कार्यालयों में ये कर्मचारी वर्षों से काम कर रहे थे, वहां अब स्टाफ की कमी सामने आ गई है। विभाग ने इस कमी को दूर करने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे यह सवाल भी सामने आया है कि जिन कार्यालयों में डेपुटेशन के सहारे अतिरिक्त कर्मचारी लगाए गए थे, वहां वास्तव में कितने पदों की जरूरत है।

अब वेतन बिल पर डीडीओ की मुहर होगी निर्णायक

डेपुटेशन खत्म करने के साथ व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव वेतन बिल को लेकर किया गया है। अब संबंधित ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग आफिसर (डीडीओ) को प्रमाणित करना होगा कि कर्मचारी ने संबंधित महीने में उसी स्टेशन पर वास्तविक रूप से ड्यूटी की है, जहां से उसका वेतन बनाया जा रहा है। प्रमाणपत्र के बिना वेतन बिल पास नहीं होगा। गलत प्रमाणन हुआ तो डीडीओ और संबंधित ट्रेजरी अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी। 

कर्मचारी की सर्विस बुक में भी तैनाती और डेपुटेशन का पूरा विवरण दर्ज करना होगा। इससे कागजों में एक जगह और जमीन पर दूसरी जगह ड्यूटी करने की गुंजाइश काफी हद तक खत्म होगी। डेपुटेशन खत्म होने के बाद विभागों को अपने मानव संसाधन का नए सिरे से आकलन करना होगा। वर्षों से मूल तैनाती से बाहर काम कर रहे कर्मचारी वापस आएंगे तो कई स्कूलों और कार्यालयों में रिक्त पद भरेंगे, जबकि निदेशालयों व अन्य कार्यालयों में स्टाफ की कमी सामने आएगी। इस पूरी प्रक्रिया से स्वीकृत पदों और वास्तविक जरूरत के बीच का अंतर भी साफ होगा।

 

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