35 वर्ष बाद परिवार से मिली प्रमिला, मिशन अपनों तक के प्रयास ने हिमाचल से ओडिशा में ढूंढ निकाले अपने
प्रमिला, जो 35 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ी हुई थीं, 'मिशन अपनों तक' की मदद से हिमाचल प्रदेश से ओडिशा में अपने परिजनों से मिल पाईं।

एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी ओडिशा में प्रमिला की परिवार से बात करवाते हुए।
HighLights
प्रमिला 35 साल बाद अपने परिवार से मिलीं।
'मिशन अपनों तक' ने हिमाचल से ओडिशा में मिलाया।
उड़िया टैटू और यादें पुनर्मिलन का सुराग बनीं।
सुभाष आहलुवालिया, नेरचौक (मंडी)। दशकों का लंबा इंतजार, धुंधली पड़तीं यादें और अपनों को दोबारा देखने की आस... आखिरकार 35 वर्ष बाद उम्मीद के रूप में सच हो गई। पंजाब की ममता, तमिलनाडु की सायरा बानो और कर्नाटक के रामन्ना के बाद मिशन अपनों तक ने एक और बिखरे परिवार को मिलाने की मिसाल पेश की है। ओडिशा के केंद्रापड़ा जिला (अलुपुआ पंचायत) की निवासी प्रमिला (संस्थागत अभिलेखों में रामकली मलिक) अब जल्द ही अपने परिवार के आंचल में होंगी।
एक टैटू और पुरानी स्मृतियों ने दिया सुराग
प्रमिला वर्ष 2011 से 2018 तक शिमला के मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में रहने के बाद नारी निकेतन और फिर वृद्ध आश्रम भंगरोटू पहुंची थी। आश्रम के दौरे पर गई एसडीएम बल्ह स्मृतिका नेगी और तहसील कल्याण अधिकारी धर्मशीला ने उनसे संवेदनशीलता से बात की। बातचीत में प्रमिला की बाजू पर ओड़िया भाषा में लिखा नाम का टैटू और कटक की बिखरी यादें एक बड़ा सुराग बनीं।
इंडिया केयर से साझा किए वीडियो
प्रमिला की बातचीत के वीडियो सुश्री सबिता चंदा और इंडिया केयर के साथ साझा किए गए। मामले में ओडिशा पुलिस के एडीजी (रेलवे) अरुण बोथरा (आइपीएस), अमित कुमार मलिक, प्रणय राउत, राजा मलिक और डा. जय चंद नेगी ने कड़ियों को जोड़ने में दिन-रात एक कर दिया।
अपनों को देखकर नम हुई आंखें
आखिरकार प्रमिला के स्वजन का ठिकाना खोज निकाला गया। 35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जब प्रमिला ने वीडियो कॉल पर अपने स्वजन का चेहरा देखा, तो दोनों तरफ से ममता और आंसुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। दशकों बाद अपनी लाडली को सही-सलामत देखकर स्वजन का गला भर आया।
वृद्ध आश्रम भंगरोटू में रहने वालों के स्वजन की तलाश का यह अभियान सक्कमा से शुरू हुआ था, जो अब प्रमिला तक पहुंच गया है।
