हिमाचल में दिवाली से पहले मंत्रिमंडल विस्तार संभव, विभागों में भी होगा फेरबदल; क्षेत्रीय संतुलन साधने की बिसात
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार दिवाली से पहले मंत्रिमंडल विस्तार और प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी में है। इस कदम का उद्देश्य क्षेत्रीय संतुलन साधना चुनावी तैयारियों को गति देना है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। जागरण आर्काइव
HighLights
दिवाली से पहले हिमाचल मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी।
कुल्लू के सुंदर सिंह ठाकुर मंत्री पद के प्रबल दावेदार।
क्षेत्रीय संतुलन और चुनावी तैयारियों पर सरकार का जोर।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुखविन्द्र सिंह सुक्खू सरकार दिवाली से पहले अपने बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार और बड़े प्रशासनिक फेरबदल की तैयारी में जुट गई है। प्रदेश कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 मंत्री हो सकते हैं, जिनमें से एक पद लंबे समय से खाली चल रहा है। इस इकलौती खाली कुर्सी के लिए कुल्लू सदर से वरिष्ठ कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का नाम सबसे आगे चल रहा है।
मुख्यमंत्री सुक्खू के साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और विधायक सुंदर सिंह ठाकुर की हालिया दिल्ली दौड़ ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि हाईकमान के साथ अंतिम दौर की चर्चा पूरी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री पहले ही 11 दिसंबर (सरकार के कार्यकाल की वर्षगांठ) से पहले विस्तार की समय सीमा तय कर चुके हैं, लेकिन चुनावी तैयारियों को गति देने के लिए यह निर्णय दिवाली से पहले ही लिया जा सकता है। सुंदर सिंह ठाकुर हमेशा से मुख्यमंत्री सुक्खू के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते रहे हैं।
बुटेल भी रेस में
मुख्यमंत्री ने बजट सत्र के दौरान विधानसभा के भीतर भी सार्वजनिक रूप से सुंदर सिंह को कैबिनेट में जगह देने के स्पष्ट संकेत दिए थे। पार्टी अब उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर पद भरना चाहती है। मंत्री पद की दौड़ में कांगड़ा जिला के पालमपुर से कांग्रेस विधायक आशीष बुटेल का नाम भी चलता रहा है।
केवल नया चेहरा नहीं, विभागों की भी होगी सर्जरी
यह कवायद केवल एक नए मंत्री को शपथ दिलाने तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अब पूरी तरह इलेक्शन मोड में आ चुकी है। कई मंत्रियों के पास इस समय भारी-भरकम और कई महत्वपूर्ण विभाग हैं। मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही मौजूदा मंत्रियों के विभागों का पुनर्गठन किया जाएगा, ताकि कुछ मंत्रियों पर काम का बोझ हल्का हो और चुनावी वर्ष में डिलीवरी व जनसंपर्क बेहतर हो सके। मुख्यमंत्री लगातार जिलों के तूफानी दौरे कर रहे हैं, जिससे साफ है कि सरकार संगठन और सत्ता के बीच तालमेल बैठाकर चुनावी मैदान में पूरी ताकत से उतरना चाहती है।
मंडी संसदीय क्षेत्र और क्षेत्रीय असंतुलन साधने की चुनौती
इस विस्तार के पीछे सबसे बड़ा गणित क्षेत्रीय संतुलन साधना है। वर्तमान में 11 सदस्यीय मंत्रिमंडल में शिमला संसदीय क्षेत्र का भारी दबदबा है, जहां से 5 मंत्री आते हैं। हमीरपुर संसदीय क्षेत्र से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित 3 चेहरे हैं, जबकि कांगड़ा से 2 मंत्री हैं। इसके विपरीत, भौगोलिक दृष्टि से सबसे बड़े मंडी संसदीय क्षेत्र से केवल जनजातीय जिला किन्नौर से जगत सिंह नेगी ही कैबिनेट में हैं।
मंडी, कुल्लू और लाहुल-स्पीति जैसे मुख्य जिलों से सरकार में कोई कैबिनेट चेहरा नहीं होने के कारण कार्यकर्ताओं में नाराजगी और जनाधार खिसकने का जोखिम बना हुआ है। सुंदर सिंह ठाकुर को शामिल करने से सरकार सीधे तौर पर कुल्लू और मंडी बेल्ट में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर सकेगी।
कुल्लू को करना पड़ता है लंबा इंतजार
कुल्लू जिले के लिए कैबिनेट प्रतिनिधित्व का इंतजार कोई नया नहीं है। ऐतिहासिक संदर्भ देखें तो पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के 2012-17 के कार्यकाल में भी कुल्लू को सरकार गठन के तुरंत बाद जगह नहीं मिली थी। तब लगभग ढाई साल के लंबे इंतजार के बाद बंजार से विधायक रहे स्व. कर्ण सिंह को आयुर्वेद मंत्री बनाया गया था।
