यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 05, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बोले जयराम, तबादले न आप रोक पाएंगे न हम
प्रश्नकाल के दौरान बुधवार को विपक्ष की ओर से तबादलों का मुद्दा उठा जिस पर सदन का माहौल गरमा गया।

शिमला, राज्य ब्यूरो। बुधवार सुबह ठीक 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ने कांग्रेस विधायक हर्षवर्धन चौहान को तबादलों पर केंद्रित पहला प्रश्न पूछने की अनुमति दी।
हर्षवर्धन: 15 फरवरी तक प्रदेश में विभागों, बोर्डों व निगमों में कर्मचारियों के कितने तबादले किए, जिलावार ब्योरा दिया जाए।
जयराम ठाकुर: इस अवधि में 2177 कर्मचारियों के तबादले किए गए हैं।
हर्षवर्धन: ये आंकड़े पूरी तरह से गलत है। असल में 15 हजार से ज्यादा तबादले हुए हैं। 2177 तबादले तो सीएम ने सदन में बैठे-बैठे किए हैं। ये तबादले क्या राजनीतिक आधार पर हुए हैं या प्रशासनिक आधार पर?
जयराम: हर बात पर आशंका, अविश्वास। कल भी बिल पर ऐसी ही आशंका थी। स्थानांतरण पहली बार हुए हैं। आपने भी किए। हालात ही कई बार ऐसे हैं। आपकी सरकार ने पांच साल में बिना दोष के ही कर्मचारियों को 'टांग' दिया। उनका जुड़ाव हमारे साथ था। हमने जो भी तबादले किए हैं, 2013 की आपकी नीति के तहत किए हैं। आपके पास ज्यादा तबादले होने का क्या फॉर्मूला है?
राजेंद्र राणा: अनुबंध कर्मियों का कितने समय केबाद तबादला किया जाता है? हमीरपुर में तो दो साल में ही दो-दो बार बदले जा रहे हैं।
जयराम: तीन साल के बाद ही ऐसे कर्मी बदले जाते हैं। इससे पहले भी इन्हें प्रशासनिक आधार पर बदलने का प्रावधान है।
मुकेश अग्निहोत्री: आप तो थोक के सौदागर हैं?
जयराम: नहीं, हम नहीं... वो तो राजा साहब थे, हम तो परचून वाले हैं। तबादले न आप रोक पाएंगे, न हम। हालात ऐसे हो गए हैं, कौन एमएलए कितना पावरफुल है, उसका आकलन इस बात से होता है कि वह कम समय में कितने तबादले कर पाता है। क्लास फोर भी एमएलए को खड़ा कर हमारे पास पेश करता है। ऐसे भी कर्मचारी हैं जो चुने हुए प्रतिनिधियों को खिलौना बनाए हुए हैं। तबादलों से कोई न एमएलए बना है और बनेगा।
-इस बीच विपक्ष के कुछ सदस्य खड़े हो गए।
बिंदल: सुनिये तो सही, हर्ष की ओर इशारा। आपको एक मिनट के बाद प्रतिपूरक सवाल पूछने की अनुमति दूंगा भैया।
जयराम: हर्ष जी, मुझे उस दिन सबसे बड़ा हर्ष होगा जिस दिन तबादले बंद हो जाएंगे।
मुकेश अग्निहोत्री: सीएम की व्यथा से एमएलए का दबाव झलका है। सरकार के तीन महीने के आंकड़े झूठ का पुलिंदा हैं। इतने तबादले तो पुलिस विभाग में ही हो गए हैं। हम साबित कर सकते हैं। विधानसभा क्षेत्रों में आतंक मचा रखा है। आपके उपदेश से बात नहीं बनेगी।
जयराम: इस वहम की बीमारी का कोई इलाज नहीं है। तबादलों में नई सरकार पर तीन महीने तक दबाव रहता है। थोड़ा सख्त लहजे में विपक्षी सदस्यों से कहा... सुन तो लीजिए?
हर्ष: सीएम लाचारी पेश कर रहे हैं। क्या? सरकार अंकुश लगाने व रिक्तियां भरने के लिए कोई एक्ट लाएगी?
जयराम: पांच साल में आपने 1,23,652 तबादले किए। इस बीच तीन चार कांग्रेस विधायक खड़े हो गए।
बिंदल: आप बैठ जाइए? इस दौरान सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों की ओर से नारेबाजी हुई। दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए।
मुकेश: यह सरकार बदला-बदली की है।
बिंदल: बैठ जाओ, बैठ जाओ।
बिंदल ने अगला प्रश्न पूछने की अनुमति दी तो विपक्षी सदस्य बैठ गए
अध्यक्ष- थैंक यू
कांग्रेस ने तीन महीने में बदले थे 6876 कर्मचारी
कांग्रेस ने सत्ता में आने पर तीन महीने में 6876 कर्मचारियों के तबादले किए थे। अब कांग्रेस विपक्ष में है तो वह सत्ता पक्ष के खिलाफ तबादलों को ही मुद्दा बना रही है।
हिमाचल में तीन लाख से अधिक कर्मचारी
हिमाचल में नियमित कर्मचारियों की संख्या करीब ढाई लाख है। अनुबंध व अस्थायी कर्मचारियों को मिलाकर यह संख्या तीन लाख से अधिक है। सरकार पर हमेशा विपक्ष तबादला उद्योग चलाने के आरोप लगाता है लेकिन सत्ता में आने पर वह भी इसे व्यावहारिक तौर पर नहीं रोकपाता है। कर्मचारी संगठित वर्ग है जो सरकार पर भी दबाव समूह के रूप में कार्य करता है। सरकार को बिगाडऩे व बनाने में कर्मचारियों की अहम भूमिका रहती है।
