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हिमाचल के सीमावर्ती क्षेत्र में मजबूत होगा सेना का आधारभूत ढांचा, राज्य सरकार ने वन भूमि हस्तांतरण को दी मंजूरी

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 24 Oct 2026 04:28 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड ने औद्योगिक विकास और सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी है।

राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अध्यता करते मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। सौजन्य डीपीआरओ

राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक की अध्यता करते मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू। सौजन्य डीपीआरओ 

HighLights

  1. सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना का आधारभूत ढांचा होगा मजबूत।

  2. औद्योगिक इकाइयों के विस्तार और नई स्थापना को मिली स्वीकृति।

  3. वन्यजीव बोर्ड ने सड़क परियोजनाओं को भी दी हरी झंडी।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक विकास और सीमावर्ती क्षेत्रों के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने से जुड़े प्रस्तावों को राज्य वन्यजीव बोर्ड ने मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई बोर्ड की 12वीं बैठक में वन भूमि हस्तांतरण, सड़क संपर्क और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार हुआ।

सीमावर्ती सुरक्षा ढांचे के लिए लाहुल स्पीति के लालुंग और धार चोकुला-काजा क्षेत्र में सीमा चौकी स्थापित करने के लिए आइटीबीपी की 17वीं बटालियन को 1.7820 हेक्टेयर वन भूमि देने की मंजूरी मिली। किन्नौर में निथल थाच अग्रिम चौकी के लिए आइटीबीपी की दूसरी बटालियन को 1.60 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित होगी।

सांगला में बनेगा ढांचा

सांगला तहसील में नागस्ती के पास सैन्य आधारभूत ढांचे के विकास के लिए रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य में 0.2750 हेक्टेयर भूमि 11 महार रेजिमेंट/मुख्यालय 136 (स्वतंत्र) इन्फैंट्री ब्रिगेड समूह को देने की स्वीकृति दी गई। 

संसारपुर टैरस में औषधि उद्योग को मंजूरी

कांगड़ा जिले के संसारपुर टैरस में औषधि निर्माण इकाई और गोयल फर्नेस प्राइवेट लिमिटेड की धातु इकाई के विस्तार को स्वीकृति दी गई। बोर्ड ने संसारपुर टैरस औद्योगिक क्षेत्र के प्रथम चरण में प्लाट नंबर 53 और 54 पर सीएमजी बायोटेक प्राइवेट लिमिटेड की इकाई स्थापित करने को मंजूरी दी। यहां सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआइ) और मध्यवर्ती उत्पाद बनाए जाएंगे। 

धातु इकाई की क्षमता पांच गुना बढ़ेगी

गोयल फर्नेस की मौजूदा इकाई की उत्पादन क्षमता 19,200 टन से बढ़ाकर 96,600 टन सालाना करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई। इसके लिए अतिरिक्त इंडक्शन फर्नेस, सतत ढलाई मशीन और रोलिंग मिल लगाई जाएंगी। विस्तार के बाद सालाना 77,280 टन गोलाकार उत्पाद, एंगल, चैनल, टीएमटी सरिया और फ्लैट उत्पाद बनाने का प्रस्ताव है। बैठक में 

भुलाह-शिकारी देवी सड़क विस्तार 

मंडी के सुकेत वन मंडल स्थित शिकारी देवी वन्यजीव अभयारण्य में भुलाह-शिकारी देवी सड़क के विस्तार और उन्नयन के लिए लोक निर्माण विभाग को 4.72 हेक्टेयर वन भूमि मिलेगी। 

बंदरों की संख्या जुटाने का आदेश

मुख्यमंत्री ने वन्यजीव विंग को प्रदेश में बंदरों की पंचायतवार संख्या का ब्योरा जुटाने के निर्देश दिए। गणना की प्रक्रिया या समय सीमा नहीं बताई गई। उन्होंने देहरा के बनखंडी में निर्माणाधीन दुर्गेश अरण्य प्राणी उद्यान की समीक्षा कर काम में तेजी लाने को कहा। 

मंडी जिले में कीरतपुर-मनाली फोरलेन के पुंग-भुवाणा टनल खंड पर वन्यजीवों की सड़क दुर्घटनाओं में मौत का मामला भी उठा। उनकी सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया, लेकिन किसी विशेष उपाय या समय सीमा की जानकारी नहीं दी गई। 

ये रहे उपस्थित

बैठक में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, विधायक संजय अवस्थी, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्यजीव) आलोक प्रेम नगर और अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

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