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हिमाचल में सेब खरीद में करोड़ों का घोटाला, MIS में हुआ खेल; बागवानों ने जितना बेचा रिकॉर्ड में उससे ज्यादा दर्ज

By Yadvinder Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 21 Sep 2026 06:26 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश में मंडी मध्यस्थता योजना (एमआइएस) के तहत सेब खरीद में एजेंटों द्वारा बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई ...और पढ़ें

हिमाचल में सेब खरीद में गड़बड़ी हुई है। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल में सेब खरीद में गड़बड़ी हुई है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. सेब खरीद में एजेंटों द्वारा रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ी।

  2. एसडीएम जांच में 20 करोड़ रुपये के घपले की आशंका।

  3. मुख्यमंत्री को कार्रवाई के लिए भेजी गई जांच रिपोर्ट।

यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल प्रदेश में मंडी मध्यस्थता योजना (एमआइएस) के तहत बागवानों से सेब खरीद में एजेंटों की भारी गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। वर्ष 2025 में हुई करीब एक लाख टन सेब की सरकारी खरीद के रिकॉर्ड में वास्तविक आपूर्ति से कई गुना अधिक सेब दर्ज किए जाने के आरोप हैं। संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम से कराई गई जांच के बाद कार्रवाई के लिए फाइल मुख्यमंत्री को भेजी गई है। जांच में सामने आए मामलों की संख्या सैकड़ों बताई जा रही है और करीब 20 करोड़ रुपये के घपले की आशंका जताई गई है।

शिमला, चंबा, मंडी समेत कई जिलों में ऐसे मामले सामने आए हैं। सबसे अधिक मामले शिमला जिले के रोहड़ू, कोटखाई, चौपाल, ठियोग और रामपुर क्षेत्र में बताए जा रहे हैं।

एसडीएम स्तर की जांच में खुलासा

एसडीएम स्तर की जांच में बागवानों से पूछताछ के दौरान कई ऐसे मामले मिले, जिनमें उन्होंने सरकारी उपक्रम हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) को सी-ग्रेड सेब की जितनी मात्रा दी, रिकॉर्ड में उससे कहीं अधिक दर्ज थी।

सेब कम दिया रिकॉर्ड में ज्यादा दर्ज

पहला ममला ऐसा सामने आया जिसमें 66 बोरी बेची और रिकार्ड में 130 दर्ज थी। कई बागवानों ने 50 से 100 बोरी सेब देने की बात कही, जबकि रिकार्ड में उनके नाम पर 200 से 350 बोरी तक की आपूर्ति दर्ज मिली।

जानकारी मांगी तो भुगतान लेने भी नहीं पहुंचे बागवान

सरकार ने जमीन के दस्तावेज, आधार कार्ड समेत अन्य जानकारी मांगी तो बड़ी संख्या में बागवान भुगतान लेने ही नहीं पहुंचे। इससे रिकार्ड में दर्ज अतिरिक्त सेब की मात्रा और उसके आधार पर किए गए भुगतान को लेकर सवाल और गहरा गया है। एचपीएमसी ने 300 से अधिक केंद्र सेब खरीद के लिए स्थापित किए थे।

केस-1 

कोटखाई के गुम्मा निवासी बलवीर चौहान एमआइएस के तहत एचपीएमसी को दी गई 66 बोरी सेब का भुगतान लेने पहुंचे। वहां उनके नाम पर 130 बोरी सेब दर्ज होने की बात सामने आई और उनसे 130 बोरी की पर्ची मांगी गई। बलवीर ने कहा कि उन्होंने 66 बोरी ही बेची हैं, इसलिए अतिरिक्त 64 बोरी की पर्ची कहां से लाएंगे। उनके अनुसार सेब उन्होंने एक ही बार दिया था, जबकि रिकार्ड में तीन बार आवक दर्ज थी।

केस-2

गुम्मा के ही एक अन्य बागवान ने करीब 200 बोरी सेब एचपीएमसी को दिए और इतनी ही मात्रा की पर्ची उनके पास थी। हालांकि रिकार्ड में उनके नाम पर 378 बोरी सेब की आपूर्ति दर्ज मिली। अतिरिक्त मात्रा से संबंधित कोई पर्ची या दस्तावेज बागवान के पास नहीं मिला। सरकार को भेजी रिपोर्ट में ऐसे कई बागवानों का उल्लेख है, जिनके नाम पर रिकार्ड में 200 से 250 बोरी तक अतिरिक्त सेब दर्ज किए गए हैं।

जांच अधिकारियों का ऐसे सैकड़ों मामले होने का दावा 

जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार मामला एक-दो बागवानों तक सीमित नहीं है। विभिन्न स्थानों पर रिकॉर्ड, पर्चियों और वास्तविक आपूर्ति का मिलान किया जा रहा है। गड़बड़ी की पुष्टि होने पर संबंधित एजेंटों के साथ रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

मामले की जांच के आधार पर फाइल मुख्यमंत्री को भेजी गई है।
-सी पाल रासु, सचिव, बागवानी विभाग।

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