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हिमाचल में कैन खाद की भारी किल्लत, सेब बागवानों की बढ़ी चिंता; मंत्री रोहित ठाकुर ने जेपी नड्डा से लगाई गुहार

Published: Fri, 04 Sep 2026 04:14 PM (IST)

सेब सीजन के बीच हिमाचल के बागवान कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (कैन) खाद की कमी से चिंतित हैं, जिससे उन्हें महंगे विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

कैन खाद की किल्लत से सेब बागवान बेहाल, रोहित ठाकुर ने नड्डा से लगाई गुहार।

कैन खाद की किल्लत से सेब बागवान बेहाल, रोहित ठाकुर ने नड्डा से लगाई गुहार।

HighLights

  1. सेब बागवान कैन खाद की कमी से जूझ रहे हैं

  2. महंगे और कम उपयुक्त विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है

  3. रोहित ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री नड्डा से हस्तक्षेप की मांग की

राज्य ब्यूरो, शिमला। सेब सीजन के बीच कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (कैन) की उपलब्धता न होने से हिमाचल के सेब बागवानों की चिंता बढ़ गई है। कैन का उत्पादन बंद होने के बाद बागवानों को महंगे और अपेक्षाकृत कम उपयुक्त विकल्पों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

सेब उत्पादन पर पड़ रहे इस संकट को देखते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को पत्र लिखकर पूरी वस्तुस्थिति से अवगत करवाया है। रोहित ठाकुर ने कहा कि सेब उद्योग हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।

यह क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष करीब 6,000 करोड़ रुपये का योगदान देता है और हजारों किसान परिवार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से इससे जुड़े हैं। ऐसे में जरूरी कृषि इनपुट की उपलब्धता में किसी भी तरह की कमी का सीधा असर बागवानों की आय पर पड़ सकता है।

कैन बंद, बढ़ गई बागवानों की मुश्किल

सेब के बगीचों के लिए 25 प्रतिशत नाइट्रोजन वाला कैन भरोसेमंद और किफायती उर्वरक स्रोत माना जाता है। इसका उत्पादन बंद होने के बाद बागवान यूरिया, कैल्शियम नाइट्रेट और मिश्रित एनपीके उर्वरकों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। इन विकल्पों की कीमत अधिक होने के साथ ये सेब के बगीचों की विशिष्ट पोषक तत्वों की जरूरत के अनुरूप भी नहीं हैं।

रोहित ठाकुर ने पत्र में यूरिया के लंबे समय तक इस्तेमाल से मिट्टी की अम्लता बढ़ने, मिट्टी की संरचना प्रभावित होने और पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचने जैसी चिंताओं का भी उल्लेख किया है। उनका कहना है कि सेब के बगीचों में संतुलित पोषण के लिए उपयुक्त उर्वरक की उपलब्धता बेहद जरूरी है।

उत्पादन बढ़ाने के बीच पेड़ों के खराब होने की चिंता

शिक्षा मंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि हिमाचल में सेब की खेती का लगातार विस्तार हो रहा है, लेकिन इसके साथ बागवानों के सामने पेड़ों के शीघ्र खराब होने और उत्पादकता में कमी जैसी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। ऐसे में उर्वरकों की कमी समस्या को और गंभीर बना सकती है।

उन्होंने केंद्र सरकार से संबंधित अधिकारियों और उर्वरक निर्माताओं को कैन का उत्पादन दोबारा शुरू करने और इसकी पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश देने का आग्रह किया।

नड्डा बोले- मामले की हो रही जांच

रोहित ठाकुर के पत्र पर केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने उन्हें आश्वासन दिया है कि संबंधित डिविजन की ओर से मामले की जांच की जा रही है। बागवानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

उन्होंने आश्वासन के बाद रोहित ठाकुर ने उम्मीद जताई कि मामले पर जल्द निर्णय होगा और सेब उत्पादकों को उचित एवं किफायती उर्वरक उपलब्ध करवाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।

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