विधि संवाददाता, शिमला : प्रदेश हाईकोर्ट में धोखाधड़ी के आरोपित अमिल मन्हास की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई पहली नवंबर तक टल गई। न्यायाधीश ने मन्हास को जांच अधिकारी के साथ जाकर अपनी वह बैंक स्टेटमेंट देने को कहा जिसके आधार पर उसका कहना है कि उसने सारी देय राशि का भुगतान कर दिया है।

कोर्ट ने आरोपित को 17 अक्टूबर को मिली अंतरिम जमानत अवधि एक नवंबर तक बढ़ाते हुए सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के साथ पूरा रिकॉर्ड पेश करने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने अमिल मन्हास को भी अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया। जांच अधिकारी को तब तक आरोपित से सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे के बीच ही पूछताछ कर जांच करने के आदेश दिए गए हैं। मन्हास पर राज्य सतर्कता व भ्ष्र्टाचार निरोधक ब्यूरो थाना ऊना में पांच सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

ऑडिट के दौरान पाया गया था कि शराब की फर्मो के लाइसेंस धारक रोहित कुमार द्वारा जमा किए गए ई चालान का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। सत्यापन के लिए सौंपे गए ई चालान भी फर्जी पाए गए। अमिल मन्हास द्वारा दिया गया चेक बाउंस हो गया था। ऊना में एक्साइज विभाग के साथ शराब की दो फर्मों द्वारा करीब दो करोड़ 63 लाख की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस मामले में एक्साइज विभाग ने विजिलेंस में मामला दर्ज करवाया है। मामले का खुलासा होने के बाद एक्साइज विभाग ने दोनों फर्मों को बकाया राशि जमा करवाने के लिए नोटिस भी जारी किए थे। जब एक्साइज विभाग ने अपने पास जमा एफडीआर चेक करवाई तो वो भी फर्जी पाई गई। आबकारी एवं कराधान विभाग के अनुसार शराब की दो फर्मों द्वारा विभाग के साथ 2.63 करोड रुपये धोखाधड़ी की गई थी। इस संबंध में विजिलेंस में शिकायत दर्ज की गई है। मामले की सुनवाई पहली नवंबर को होगी।

Posted By: Jagran

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