विधि संवाददाता, शिमला : प्रदेश हाईकोर्ट के दखल के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं सरवन सिंह को प्रदेश सरकार ने रिहा करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को कहा किकानून के अनुसार उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। हाईकोर्ट को गृह विभाग की ओर से बताया गया कि प्रार्थी सरवन कुमार के अलावा चंद्र मोहन, रणजीत सिंह, विमल सिंह, मोहन सिंह, मनसाराम, कृष्ण कुमार, हंसराज, प्रेम सिंह, सुरजीत सिंह, दिनेश्वर ओझा और रामदास को भी रिहा करने बाबत प्रदेश सरकार की ओर से स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन लोगों को रिहा किया जा सकता है। हाईकोर्ट को लिखे पत्र के अनुसार प्रार्थी 16 अप्रैल 1998 से आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। प्रार्थी ने प्रदेश सरकार द्वारा आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की रिहाई पर निर्णय लेने के लिए गठित कमेटी के समक्ष पहले भी गुहार लगाई थी, लेकिन उस पर सरकार ने कोई फैसला नहीं किया। प्रार्थी की उम्र 68 वर्ष है और एक गरीब परिवार से संबंध रखता है। 20 साल से कारागार में रहने के कारण परिवार संघर्षपूर्ण जीवन जीने के लिए विवश है। प्रार्थी के अलावा अन्य कोई भी कमाने वाला नहीं है और न ही आय का कोई नियमित साधन है। मकान की मरम्मत न होने के कारण गिर चुका है। पुश्तैनी भूमि पर लंबे समय से कृषि कार्य न होने के कारण उपजाऊ भूमि भी बंजर हो चुकी है। प्रार्थी ने इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत प्रदेश उच्च न्यायालय से रिहाई की गुजारिश की थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेने के बाद प्रदेश सरकार को कार्रवाई अमल में लाने के आदेश जारी किए थे। सरकार ने 10 अगस्त 2018 को प्रार्थी को जेल से रिहा करने बाबत नीतिगत फैसला ले लिया है। आदेश जारी कर दिए हैं।

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