यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 01, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं मेंः मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान देश में एक आधुनिक एवं प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान के रूप में उभरा है।

शिमला [वेब डेस्क] : मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान चिकित्सा संस्थान देश में एक आधुनिक एवं प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान के रूप में उभरा है और अब यह संस्थान ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ बनने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री आज शिमला के आईजीएमसी में निरन्तर चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम एवं हृदय रोग विभाग के एक सम्मेलन, जो स्वर्ण जयन्ती समारोह का एक भाग है, के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे।
पढ़ें: वीरभद्र बोले, मेरे प्रदेश के दौरों से भाजपा को पड़ते हैं दौरे
उन्होंने कहा कि आईजीएमसी राज्य का एक उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्थान है और राज्य सरकार इस संस्थान को आधुनिक उपकरण एवं प्रौद्योगिकी प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है, ताकि लोग यहां बेहतर उपचार प्राप्त कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह आईजीएमसी शिमला में हृदय रोग का सम्पूर्ण विकसित विभाग के रूप में देखना चाहते हैं, ताकि लोगों को हृदय रोगों के उपचार के लिए बाहरी राज्यों में न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि आज हृदय रोग विभाग में अत्याधुनिक कैथ लैब, सघन चिकित्सा यूनिट (आईसीयू), पीस मेकर के लिए सुविधा, कलर डॉप्लर, इको-कार्डियोग्राफ, ईसीजी सहित अन्य परीक्षण सुविधा तथा अन्य सम्बन्धित आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं।
पढ़ें: वीरभद्र सिंह बोले नकारात्मक सोच के साथ काम कर रहा विपक्ष
वीरभद्र सिंह ने कहा कि यह बड़े गौरव की बात है कि आईजीएमसी में अब ओपन हार्ट सर्जरी भी की जा रही है। संस्थान में सभी प्रमुख विशेषज्ञ विभागों में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर पीजीआईएमईआर, मद्रास मेडिकल कॉलेज चेन्नई, डीएमसी लुधियाना एवं एम्स से ‘एक्यूट कॉरोनरी सिंड्रोम अपडेट’ सम्मेलन में विशेष तौर पर आमंत्रित चिकित्सकों सम्मानित भी किया। एसीएस पंजीकरण के लिए क्षेत्रीय अस्पताल हमीरपुर को प्रथम तथा मण्डी को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया। चैरीटेबल अस्पताल भोटा के डा. विजय सहगल को एसीएस के निजी पंजीकरण के लिए सर्वश्रेष्ठ आंका गया।
पढ़ें: नवरात्र : हिमाचल के इन शक्तिपीठों में होती है मनोकामना पूर्ण
स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि 1992 में हृदय रोग का अलग विभाग स्थापित किया गया और तब से लेकर इस विभाग ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बहुत विकास किया है। प्रधान सचिव स्वास्थ्य प्रबोध सक्सेना, आईजीएमसी के प्राचार्य डा. अशोक शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डा. बलदेव ठाकुर, निदेशक चिकित्सा शिक्षा डा. केपी चौधरी, दन्त महाविद्यालय के प्रचार्य डा. आर.पी. लुथरा, आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश चन्द, उप चिकित्सा अधीक्षक डा. राहुल राव, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष एस.एस. जोगटा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। .
