क्षितिज सूद, नेरवा

चौपाल क्षेत्र के समाजसेवी विशाल चौहान ने प्रदेश में नशे के बढ़ते कारोबार पर गहरी चिंता व्यक्त की। कहा कि आए दिन नशे की खेप के साथ लोगों के पकडे़ जाने से स्पष्ट होता है कि नशे का काला कारोबार अपनी जड़ें कितनी मजबूत कर चुका है। प्रतिदिन चरस, गाजा व चिट्टा आदि के साथ लोगों को पकड़ा जा रहा है, इसके बावजूद इस काले कारोबार पर कोई रोक नहीं लग पा रही है। प्रदेश की चौहार घाटी चरस के कारोबार के लिए पूरे विश्व में कुख्यात हो चुकी है, जोकि देवभूमि के लिए शर्म की बात है। देवभूमि को अध्यात्म के लिए जाना जाता था और कहां यह नशे के लिए कुख्यात होती जा रही है। सरकार के भाग उखाड़ो जैसे कार्यक्रम महज कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं। विशाल ने बताया कि तीन नवंबर 2015 को राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने नशे के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें उन्हें भी आमंत्रित किया गया था। बैठक में तत्कालीन डीजीपी संजय कुमार, नारकोटिक्स विभाग के विनोद कुमार, ड्रग कंट्रोलर मारवाह, वर्तमान मुख्य सचिव विनीत चौधरी व मनीषा नंदा सहित कई विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया था। नारकोटिक्स विभाग द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार बताया गया था कि प्रदेश में प्रतिवर्ष 100 टन चरस व बीस टन अफीम का उत्पादन हो रहा है। इस पर राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए नशे पर शीघ्र पूरी तरह नकेल कसने की योजना बनाने के निर्देश दिए थे। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने कहा था कि तीन साल के भीतर नशे को पूरी तरह उखाड़ फेंका जाएगा व प्रदेश में कहीं पर भी एक भी पौधा भांग अथवा अफीम का नजर नहीं आएगा।

विशाल ने कहा कि तीन साल का समय भी बीतने को है, लेकिन न तो प्रदेश में नशे की कोई कमी आई और न ही भाग, अफीम के पौधे समाप्त हुए। प्रतिदिन चरस, अफीम आदि पकडे़ जाने के मामले इस बात के गवाह हैं। इसके अलावा चिट्टा के नशा भी पांव पसार चुका है, जोकि बहुत गंभीर है। सरकार को नशे के खिलाफ सख्त से सख्त कानून बनाकर इसे धरातल पर लागू कर स्थानीय लोगों से तालमेल बैठा कर नशे की पैदावार व कारोबार पर नकेल कसने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए।

By Jagran