राज्य ब्यूरो, शिमला : चालीस वर्ष से कम उम्र की महिला अगर विधवा हो जाए तो उसे पेंशन लगाने के आय के मापदंडों में सरकार बदलाव करेगी। अभी ऐसी विधवा के परिवार की वार्षिक आय 35 हजार रुपये होने का प्रावधान है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगी।

विधानसभा में भाजपा विधायक कमलेश कुमारी के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आय मापदंड में बदलाव करने पर विचार करेगी क्योंकि ऐसी विधवाओं के सामने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए विकट हालात पैदा हो जाते हैं। इसी सवाल के उत्तर में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने कहा कि कम उम्र की विधवाओं पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ता है। इसे देखते हुए सरकार ने विधवाओं की बेटी के विवाह के लिए 51 हजार रुपये की सहायता देने का फैसला लिया है। पहले यह राशि 40 हजार रुपये होती थी। यह राशि केवल अनुसूचित जाति से जुड़ी विधवा की बेटी का विवाह करवाने के लिए दी जाती थी। अब सभी वर्गो की बेटियों को एक समान लाभ मिलेगा। विधवाओं की पढ़ी-लिखी बेटियों का कौशल विकास निगम के माध्यम से हुनर बढ़ाया जाएगा। उन्हें स्वरोजगार चलाने के लिए ऋण दिया जाएगा। पांवटा के विधायक सुखराम चौधरी ने कम उम्र की विधवाओं को दी जाने वाली पेंशन के मापदंड बदलने की मांग उठाई। कांग्रेस विधायक सुखविदर सुक्खू ने मासिक पेंशन में बढ़ोतरी करने की सुझाव दिया। मंत्री ने कहा कि विधवाओं की कन्याओं को दसवीं से लेकर स्नातक तक मेरिट के आधार पर 10 हजार रुपये छात्रवृत्ति देने का भी प्रावधान किया गया है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत विधवाओं को तीन तरह की पेंशन दी जाती है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पेंशन योजना के तहत इस साल जुलाई तक विधवा पेंशन के 23551 मामले स्वीकृत किए गए। विधवाओं, परित्यक्ता व एकल नारी पेंशन के 92267 मामले स्वीकृत किए। कुल 115818 मामले स्वीकृत किए गए हैं।

Posted By: Jagran

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