विमल नेगी मौत मामला: हिमाचल पुलिस के अफसर से CBI ने की लंबी पूछताछ, अब क्या है जांच का पहलू?
सीबीआई ने विमल नेगी मौत मामले की जांच के तहत शिमला में एक पुलिस अधिकारी से घंटों पूछताछ की। यह ...और पढ़ें

विमल नेगी मौत मामले में सीबीआई ने हिमाचल पुलिस के अफसर से पूछताछ की है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
सीबीआई ने शिमला में पुलिस अधिकारी से की घंटों पूछताछ।
जांच में शुरुआती पुलिस कार्रवाई और पेन ड्राइव अहम पहलू।
हाई कोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही मामले की जांच।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के मुख्य अभियंता विमल नेगी की मौत के मामले की जांच के लिए शिमला पहुंची सीबीआई की टीम ने मंगलवार को शिमला स्थित सीबीआई कार्यालय में मामले से जुड़े एक पुलिस अफसर से घंटों पूछताछ होने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली से पहुंची टीम में एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी सहित पांच सदस्य शामिल हैं।
क्या है जांच का पहलू
सीबीआइ जांच का अहम पहलू विमल नेगी के लापता होने से लेकर शव मिलने तक की परिस्थितियों और शुरुआती पुलिस कार्रवाई से जुड़ा है। जांच एजेंसी पहले भी शिमला पुलिस की एसआइटी से पूछताछ कर मामले से जुड़े दस्तावेज हासिल कर चुकी है।
शिमला पुलिस ने की थी शुरुआती जांच
मामले में शुरुआती जांच शिमला पुलिस ने की थी। स्वजन ने जांच पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने 23 मई 2025 को मामले की जांच सीबीआइ को सौंपने के आदेश दिए थे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि जांच में हिमाचल प्रदेश कैडर का कोई पुलिस अधिकारी शामिल नहीं होगा।
पेन ड्राइव को लेकर उठे थे गंभीर सवाल
सीबीआइ की जांच में विमल नेगी की पेन ड्राइव को लेकर गंभीर सवाल उठे थे। आरोप था कि शव मिलने के बाद पेन ड्राइव को विधिवत संबंधित पुलिस टीम को सौंपने के बजाय अपने पास रखा और बाद में उसका डाटा फार्मेट किया।
मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई, घटनास्थल से जुटाए साक्ष्य, पेन ड्राइव से जुड़ा प्रकरण और ऊर्जा निगम में विमल नेगी के कार्यकाल के दौरान सामने आए विवाद जांच के महत्वपूर्ण पहलू रहे हैं। सीबीआइ की आगामी कार्रवाई पर सबकी नजर टिकी हुई है।
यह है मामला
विमल नेगी 10 मार्च 2025 को शिमला स्थित कार्यालय से लापता हुए थे। 18 मार्च को उनका शव बिलासपुर जिले में गोबिंद सागर झील से बरामद हुआ था। नेगी की पत्नी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ऊर्जा निगम के तत्कालीन एमडी हरिकेश मीणा व निदेशक देसराज समेत अन्य उच्च अधिकारियों पर पति को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। इन आरोपों की जांच के लिए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर जांच करवाई और पुलिस ने एसआइटी गठित की थी। स्वजन की ओर से पुलिस जांच पर सवाल उठाए जाने के बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा। अदालत के आदेश पर जांच सीबीआइ को सौंप दी गई। 27 मई 2025 को सीबीआइ ने मामले में प्राथमिकी दर्ज की। 14 सितंबर को सीबीआइ ने एएसआइ पंकज शर्मा को गिरफ्तार किया। 31 मार्च 2026 को सीबीआइ ने विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल की। इसमें हरिकेश मीणा, देसराज और पंकज शर्मा के नाम शामिल हैं।
