यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
कोटखाई मामला, चार जुलाई को ही हुई थी गुड़िया की हत्या
गुड़िया चीखे-चिल्लाए न इसलिए दरिंदों ने पहले तीन मिनट तक हाथों से मुंह बंद कर सांसें रोकी।

राज्य ब्यूरो, शिमला। सूरज केस के बाद सीबीआइ ने अब कोटखाई में दुष्कर्म के बाद छात्रा की हत्या मामले पर पूरा ध्यान केंद्रित कर दिया है। जांच एजेंसी पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही मामले को सुलझाएगी। सूत्रों के मुताबिक, असली आरोपियों तक पहुंचने के लिए यही रिपोर्ट सबसे बड़ा जरिया बन रही है। सूत्रों ने बताया कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआइ की एसआइटी आरोपियों के करीब पहुंच गई है।
जांच में पता चला है कि गुडि़या की मौत 4 जुलाई को शाम 5 से 6 बजे के बीच हुई थी। सीबीआइ को सौंपी गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफटीए कार्ड के आधार पर ही जांच की दिशा तय हो रही है। इसके मुताबिक, गुड़िया चीखे-चिल्लाए न इसलिए दरिंदों ने पहले तीन मिनट तक हाथों से मुंह बंद कर सांसें रोकी। इससे वह बेहोश हो गई। इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म हुआ। इस बीच, मासूम का गला दबाया गया। इससे उसकी मौत हो गई। सीबीआइ के पास मौजूद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पूरा ब्योरा दिया गया है। अपराध में एक से ज्यादा व्यक्ति संलिप्त थे।
शव में मौजूद डीएनए के आधार पर ही पुलिस के माध्यम से पकड़े गए सभी आरोपी बेगुनाह साबित हो सके। ये डीएनए किसके हैं, संदिग्धों के सैंपल से इसका मिलान करवाया जा रहा है। पहले पकड़े गए आरोपियों के साथ इसका मिलान नहीं हो पाया। अब सीबीआइ की जांच आइजीएमसी में हुए पोस्टमार्टम के इर्द-गिर्द ही घूम रही है। छात्रा को महासू स्कूल में चार बजे तक देखा गया। मौत से दो से चार घंटे पहले छात्रा ने भोजन ग्रहण किया था।
उसने चावल के साथ कड़ी या पीली दाल खाई। कहां खाई? इसकी जांच हो रही है। 6 जुलाई को सुबह करीब सवा आठ बजे छात्रा का शव दांदी जंगल में बरामद हुआ। पुलिस ने फॉरेंसिक प्रयोगशाला के फोटोग्राफिक्स सेक्शन से मौके पर फोटो नहीं करवाए और न ही घटनास्थल से डॉक्टरों की मौजूदगी में सैंपल उठाए। ऐसी लापरवाही क्यों की? इसकी जांच हो रही है। शव के फोटोग्राफ पुलिस ने अपने मोबाइल में ही खींचे थे।
किन कारणों से हुई मौत
मौत का पहला कारण मुंह बंद कर सांसें रोकना व दूसरा कारण गला दबाना रहा। फॉरेंसिक विशेषज्ञों की राय में अगर किसी भी व्यक्ति की तीन मिनट तक सांस बंद करवा दें तो वह बेहोश हो जाता है। संबंधित व्यक्ति कोमा में चला जाता है। अगर बीच में रही प्रक्रिया निरतंरता में बनी रहे तो फिर 5 से 15 मिनट के बीच मौत हो जाती है।
जहां तक गुडि़या का सवाल है, उसके शव में पीठ पर लकड़ियों, छोटे टुकड़ों जैसे निशान थे। गर्दन से नीचे काटने के चार निशान थे। प्राइवेट पार्ट में भी चोटें थीं। रिपोर्ट में संभावना जताई गई कि शव के हालात घर के नहीं जंगल जैसे मालूम पड़ रहे थे।