जागरण संवाददाता, शिमला : हिमाचल में फर्जी डिग्री मामले की निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग ने जांच शुरू कर दी है। आयोग ने दोनों निजी विश्वविद्यालयों से 26 फरवरी तक डिग्रियों का रिकॉर्ड देने के निर्देश दिए थे। एपीजी शिमला विश्वविद्यालय ने स्थापना से लेकर अब तक कितने विद्यार्थियों ने दाखिला लिया, कितनों को डिग्री दी गई है इसका पूरा रिकॉर्ड आयोग के पास जमा करवा दिया है। वहीं, मानव भारती विश्वविद्यालय ने आयोग से सारा रिकॉर्ड देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। आयोग अब इस रिकॉर्ड को दाखिले के रिकॉर्ड से सत्यापित (मिलाएगा) करेगा। यदि इसमें कोई अनियमितता पाई जाती है तो विश्वविद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

उधर, पुलिस ने भी इस मामले में जांच शुरू कर दी है। आयोग से दोनों निजी विश्वविद्यालयों का रिकॉर्ड मांगा है। हिमाचल में चल रहे निजी विश्वविद्यालयों ने कितने विद्यार्थियों को डिग्रियां बांटी हैं इसका कोई भी रिकॉर्ड आयोग के पास नहीं है। आयोग ने इस मामले को लेकर बुधवार दोपहर को आपात बैठक बुलाई थी। चेयरमैन के न होने के चलते बैठक नहीं हो पाई।

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दो विश्वविद्यालयों के खिलाफ चल रही जांच

प्रदेश के दो निजी विश्वविद्यालयों में फर्जी डिग्रियां देने का आरोप है। इसको लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को शिकायत भेजी है। यूजीसी ने प्रदेश सरकार को इस मामले को लेकर पत्र लिखा है। यूजीसी से मिले पत्र के बाद नियामक आयोग ने इन विश्वविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए डीजीपी को पत्र लिखा है।

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एपीजी शिमला विश्वविद्यालय ने डिग्रियों से जुड़ा सारा रिकॉर्ड दे दिया है। मानव भारती ने इसके लिए दो सप्ताह मांगे हैं। रिकॉर्ड को सत्यापित किया जा रहा है कि कितने विद्यार्थियों ने दाखिला लिया था और कितनों को डिग्रियां दी गई। इसके बाद मामले में आगामी कार्रवाई होगी।

-पूनम, सचिव निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग।

Posted By: Jagran

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