जागरण संवाददाता, शिमला : जिला शिमला और किन्नौर में सेब सीजन अब अंतिम दौर में है। दोनों ही जिलों से अभी तक एक करोड़ 70 लाख 47 हजार 928 पेटियां मंडियों में पहुंच चुकी हैं। प्रदेश कृषि विपणन बोर्ड के अुनसार मार्केट यार्ड में 65 लाख 20 हजार 686 पेटियां 20 किलो की पहुंची हैं। वहीं आउटसाइड द मार्केट यार्ड यानी, जिन्हें मार्केट यार्ड से बाहर सेब का कारोबार करने के लाइसेंस दिए हैं उनके पास 10527242 पेटियां पहुंची हैं।

अभी जिले में 15 से 20 दिन और सेब का सीजन चलेगा। शिमला जिले में सेब सीजन लगभग समाप्ति पर है। जबकि किन्नौर में अभी भी दो से तीन लाख सेब की पेटियां आनी हैं।

मार्केटिंग बोर्ड के अनुसार शिमला जिले में कंपनियों के जितने भी कोल्ड स्टोर हैं उनसे भी डाटा एकत्र किया जा रहा है। उनसे पूछा गया है कि उन्होंने कितनी पेटियां सेब की खरीदी हैं। इसके बाद सारा डाटा तैयार किया जाएगा। मार्केटिंग बोर्ड की मानें तो इस बार दोनों ही जिलों में सेब के उत्पादन में 30 फीसद तक की गिरावट आई है। इस बार फसल ही काफी कम थी। 26 अगस्त के बाद नहीं मिले दाम

सेब सीजन के शुरुआती दौर में बागवानों को काफी अच्छे दाम मिले हैं। 1500 से लेकर चार हजार प्रति पेटी सेब की बिकी। 26 अगस्त के बाद सेब के दाम में अचानक गिरावट आ गई। इसके बाद बागवानों का 800 से 1200 और 1500 रुपये प्रति पेटी भी सेब बिका। जिला शिमला में कुल उत्पादन का 70 फीसद होता है सेब

प्रदेश के 12 में से सात जिलों में सेब होता है। सबसे ज्यादा सेब ऊपरी शिमला में होता है। करीब एक लाख से ज्यादा बागवान सेब व्यवसाय से जुड़े हैं। कुल उत्पादन का 70 फीसद सेब शिमला जिला में होता है। इस वर्ष सेब सीजन पर कोरोना का काफी असर पड़ा है। इसके कारण मजदूर नहीं मिलने से परेशानी हुई। पिछले साल की अपेक्षा इस बार सेब का उत्पादन कम है। बागवानों को अच्छे दाम मिले हैं। कई नामी कंपनियों ने सीधे बागवानों से सेब की खरीद की है।

नरेश ठाकुर, एमडी, कृषि विपणन्न बोर्ड।

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