देवेंद्र ठाकुर, रिवालसर

बल्ह हल्के के सिध्यानी स्कूल में बनाए क्वारंटाइन सेंटर में रखे युवाओं के लिए न तो पीने के पानी की और न ही खाने की व्यवस्था है। यहां इन्हें स्वयं खाना बनाना पड़ रहा है। पानी भी गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा उपलब्ध करवाया गया है। अव्यवस्था का हाल यह है कि यहां पर इन लोगों के साथ कैदियों की तरह व्यवहार किया जा रहा है।

यहां ठहरे तीनों युवक 17 मई को महाराष्ट्र के पुणे से रेड जोन से आए थे। इन युवकों को पंचायत व जिला प्रशासन द्वारा खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। युवकों के स्वजनों ने घर से ही बिस्तर व खाने पीने का सामान स्कूल भवन में मुहैया करवाया। महाराष्ट्र के पुणे में साइमन कंपनी में कार्यरत तीन युवक उमेश, मोरध्वज व खूबराम निवासी डणु का कहना है कि उन्हें आधी रात को स्कूल भवन में छोड़ दिया गया था। यहां पर न तो पीने के लिए पानी था और न ही खाना था। जुगाड़ कर तीनों युवक स्कूल भवन में स्वयं खाना बना रहे हैं। यहां पीने के पानी की टंकी का पानी खराब होने के कारण इसे पी नहीं सकते थे। स्थानीय पंचायत के एक व्यक्ति ने मानवता की मिसाल पेश कर सुबह शाम एक घड़ा पानी का इन्हें उपलब्ध करवाया। स्थानीय पंचायत व प्रशासन की बदहाल व्यवस्था को लेकर युवकों व उनके स्वजनों में आक्रोश है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लिए गए कोरोना के सैंपल में इन युवकों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

------- हमें युवकों को केवल ठहराने का प्रबंध करने के आदेश थे। इसके बाद हमने स्कूल के कमरे उपलब्ध करवाए हैं।

इंद्रवीर, पंचायत प्रधान

-------- हमें सुविधाओं की कमी के संबंध में जानकारी मिली है। इस मामले में बीडीओ बल्ह को जांच के आदेश दिए हैं।

आशीष शर्मा, एसडीएम बल्ह।

Posted By: Jagran

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