जागरण संवाददाता, मंडी : वेतन विसंगति को दूर करने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की जा रही है, उसमें विज्ञान अध्यापक संघ को भी शामिल किया जाए। यह मांग हिमाचल प्रदेश विज्ञान अध्यापक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से की। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र ठाकुर की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनको मांग पत्र सौंपा।

संघ के महामंत्री अवनीश कुमार ने बताया कि मुख्य सचिव की कमेटी में संघ के सदस्यों को शामिल करें, ताकि टीजीटी काडर की मांग को उठाया जा सके। उन्होंने पंजाब पे कमीशन को हिमाचल में यथावत लागू करना, विज्ञान अध्यापकों की वेतन विसंगति को दूर करना तथा ताकि इनिशियल ग्रेड पे 18450 रुपये जो एक जनवरी 2016 को जो ले रहे थे उसी बेसिक पर आगे की पे फिक्सेशन की जाए। विज्ञान अध्यापक संघ ने सरकार के समक्ष अपने प्रायौगिक भत्ता जोकि 20 वर्ष से 150 रुपये मिल है उसे 1000 रुपये करने की मांग की। 2008-10 में भर्ती एवं पदोन्नति नियमों को दरकिनार कर अनुबंध पर जिन शिक्षकों की भर्ती की गई थी, पहले आठ वर्ष अनुबंध काल काटने के बाद जब 2015 में वे लोग नियमित किए हुए तो दो साल प्रोबेशन पीरियड की तलवार उन पर और लटक गई, जिसका खामियाजा उन्हें इस वेतनमान के मिलने पर भुगतना पड़ रहा है। आज भी इस वेतनमान में उनके हाथ निराशा ही लगी है। उन्होंने कहा के मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को सुना और सकारात्मक फैसला लेने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में कोषाध्यक्ष लवलीन, प्रदेश प्रवक्ता देशराज ठाकुर, मीडिया प्रभारी सुनील वर्मा सहित अन्य मौजूद थे।

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