हंसराज सैनी, मंडी

लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नेरचौक कोरोना मरीजों के उपचार के लिए फिर तैयार है। कोरोना की पहली लहर के दौरान यहां 11 माह तक सात जिलों के करीब 1244 संक्रमितों का उपचार हुआ था। इस दौरान व्यवस्था में जो खामियां पाई गई थी, उनसे सबक लेते हुए कॉलेज प्रबंधन ने इस बार कई बदलाव किए हैं। कोरोना संक्रमितों की पर्ची व दाखिल से संबंधित दस्तावेज इस बार कोविड वार्ड के प्रवेश द्वार पर बनेंगे। पिछली बार यह व्यवस्था आपातकालीन वार्ड में थी। इससे संक्रमितों के स्वजनों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। गंभीर मरीजों के लिए इस बार ऑक्सीजन की व्यवस्था प्रवेश द्वार से रहेगी। जिस मरीज को एंबुलेंस में ऑक्सीजन लगी होगी। उसे एंबुलेंस से वार्ड तक ऑक्सीजन लगाकर शिफ्ट किया जाएगा।

मरीज के एक्स-रे व ईसीजी वार्ड में ही होंगी। इसके लिए पोर्टेबल मशीनों की व्यवस्था की गई है। सीटी स्कैन के लिए मंडी के चक्कर नहीं काटना पड़ेंगें। कॉलेज कैंपस में ही सीटी स्कैन होगा। कोरोना मरीज सबसे पहले छठी मंजिल में बनाए वार्ड में भर्ती होंगे। इस वार्ड में 38 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। हर बिस्तर के साथ ऑक्सीजन पोर्ट लगा हुआ है। वार्ड में पहले से ज्यादा वेंटीलेशन की व्यवस्था की गई है। शौचालय में गीजर लगाए गए हैं। कोविड वार्ड के साथ लगते एक कमरे में ऑपरेशन थियेटर व लेबर रूम बनाया गया है। कोरोना संक्रमित गर्भवती महिला का इसी लेबर रूम में प्रसव करवाया जाएगा। हर वार्ड में 10 से 15 एग्जॉस्ट फैन लगाए गए हैं।

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अनुभवी चिकित्सक व अन्य स्टाफ की ड्यूटी

कोरोना वार्ड में उन्हीं चिकित्सकों व स्टाफ की ड्यूटी लगाई है जो पहली लहर के दौरान सेवाएं दे चुके हैं। छठी के अलावा 5वीं, चौथी व तीसरी मंजिल पर 100 से अधिक बिस्तरों की व्यवस्था की गई है।

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कोरोना संक्रमितों के उपचार की मेडिकल कॉलेज में पूरी व्यवस्था कर ली गई है। पिछली गलतियों से सबक लेकर कई सुधार किए गए हैं।

-डा. आरसी ठाकुर, प्राचार्य नेरचौक मेडिकल कॉलेज।

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