जागरण संवाददाता, मंडी : हिमाचल वन अधिकार मंच 11 अप्रैल को सेरी मंच पर धरना देगा। संसद में पारित वन अधिकार कानून को प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मंच प्रभावित लोगों को लामबंद करने में जुट गया है।

मंच के श्याम सिंह चौहान, अक्षय जसरोटिया, प्रकाश भंडरी व मानसी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह कानून राज्य की खेतीबाड़ी और पशुपालन पर आधारित आबादी के लिए महत्वपूर्ण है। मगर प्रदेश की सरकार और प्रशासन इस कानून को लागू करने में विफल है। मंडी में इसकी आड़ में भेड़ व पशुपालकों के अलावा वनों पर आधारित लोगों के हितों पर न केवल कुठाराघात किया है। बल्कि उनके साथ धोखा किया गया है। मंडी जिला प्रशासन ने वन भूमि पर बिना पट्टे के काबिज परिवारों के सिर पर बेदखली का खतरा डाल दिया है। 2004 में गलत प्रक्रिया अपनाते हुए जिला में पंचायत सचिवों के माध्यम से विकास योजनाओं को वन भूमि प्रदान करने के नाम पर गैर कानूनी तरीके से फार्म पर वन अधिकार समितियों एवं ग्राम सभाओं से यह लिखाया कि लोगों के जंगलों और वन भूमि पर कोई अधिकार नहीं है। इसके चलते शून्य दावों के प्रमाण पत्र लिए गए। यहीं प्रक्रिया चंबा और अब कांगड़ा में 90 दिनों की समय सीमा लगाकर समितियों से शून्य के दावे लिए जा रहे हैं। करीब डेढ़ लाख परिवार प्रदेश में ऐसे हैं जो वन भूमि पर आधारित हैं।

मंडी जिला का आंकड़ा 40 हजार के पार बैठता है। ऐसे परिवार इस कानून के तहत हकदार हो सकते हैं और वे व्यक्तिगत दावे पेश कर सकते हैं। 11 अप्रैल की रैली के दौरान एक ज्ञापन प्रशासन को दिया जाएगा। इसमें इन गलत प्रस्तावों और शून्य दावों को तुरंत खारिज करने की मांग की जाएगी।

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