दो बीघा जमीन में 2 लाख रुपये कमाई, ड्रैगन फ्रूट ने बदली मंडी के किसानों की तकदीर; सरकार से 50% सबसिडी भी मिली
मंडी के सरकाघाट क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती ने किसानों की तकदीर बदल दी है। रूप लाल और टेकचंद ...और पढ़ें

मंडी के इन किसानों ने ड्रैगन फ्रूट के बगीचे लगाए हैं।
HighLights
मंडी के किसानों ने ड्रैगन फ्रूट से लाखों कमाए।
50% सरकारी अनुदान पर लगाए गए ड्रैगन फ्रूट के बगीचे।
कम पानी में 17-20 साल तक उत्पादन संभव।
जागरण संवाददाता, मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी में सरकाघाट क्षेत्र के बागवान रूप लाल और टेकचंद की तकदीर ड्रैगन फ्रूट बदल रहा है। दोनों ने दो-दो बीघा जमीन पर बगीचे लगाए हैं। भरनाल गांव में रूप लाल को पहली व्यावसायिक पैदावार से करीब दो लाख रुपये की आमदनी हुई है। रूप लाल के मुताबिक पारंपरिक खेती को छोड़कर वर्ष 2023 में बागवानी विभाग, सरकाघाट से उन्हें ड्रैगन फ्रूट की जानकारी दी।
50 प्रतिशत अनुदान पर खरीदे 400 पौधे
उन्होंने गोपालपुर की पंजीकृत नर्सरी से जंबो-रेड फ्लेश किस्म के करीब 400 पौधे खरीदे और आरसीसी रिंग पोल सपोर्टेड तकनीक से बगीचा तैयार किया। बागवानी विभाग के माध्यम से 50 प्रतिशत अनुदान मिला। रूप लाल ने प्राकृतिक और जैविक विधियों से पौधों की देखभाल की और रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं किया।
एक सीजन में 5 बार तोड़े फल
बगीचे के तीसरे वर्ष उन्हें पहली पैदावार मिली। एक सीजन में अब तक पांच से छह बार फल तोड़े गए हैं। बाजार में फल करीब 180 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहे हैं।
टेक चंद ने भी लगाया बगीचा
भरनाल गांव के टेक चंद ने भी दो बीघा में ड्रैगन फ्रूट का बगीचा लगाया है और उन्हें स्थापना लागत पर 50 प्रतिशत अनुदान मिला। उनका मानना है कि कम लाभ देने वाली पारंपरिक फसलों के बजाय बागवानी से किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
उद्यान विकास अधिकारी सरकाघाट शबनम राणा ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है और इसे अपेक्षाकृत कम पानी चाहिए। गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों में इसकी खेती की संभावनाएं हैं। भूमि सुधार और समतलीकरण के बाद ढलानदार खेतों में भी इसे उगाया जा सकता है।
20 वर्ष तक उत्पादन संभव
उचित देखभाल से पौधे लगभग 17 से 20 वर्षों तक उत्पादन दे सकते हैं। मिशन फार इंटेग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच) के तहत पात्र बागवानों को स्थापना लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान मिलता है। आरसीसी रिंग पोल ट्रेलिस तकनीक में एक पोल के चारों ओर चार पौधे लगाए जाते हैं। खाली जगह में उपयुक्त सह-फसलें उगाकर भी आय बढ़ाई जा सकती है।
