दिवाली और करवाचौथ के लिए सजे मिट्टी के उत्पाद, मंडी में 25 साल का युवा भी बढ़ा रहा परंपरा को आगे
मंडी के बाजार दिवाली और करवाचौथ के लिए पारंपरिक मिट्टी के उत्पादों से सज गए हैं, जहाँ स्थानीय कारीगर दीये ...और पढ़ें

मंडी बाजार में दिवाली और करवाचौथ के लिए मिट्टी के दीये व करवे बेचने के लिए बैठा युवा व बुजुर्ग दंपती।
HighLights
मंडी के बाजार दिवाली-करवाचौथ के लिए मिट्टी उत्पादों से सजे।
स्थानीय कारीगर 30 साल से दीये, कलश बनाकर बेच रहे।
25 वर्षीय युवा भीम सिंह भी पारिवारिक परंपरा बढ़ा रहे।
साक्षी ठाकुर, मंडी। त्योहारी सीजन के साथ ही हिमाचल प्रदेश में मंडी के बाजार दिवाली और करवाचौथ के लिए सज गए हैं। घरों को रोशन करने के लिए महिलाएं दीये, कलश और पूजा का सामान खरीद रही हैं। विदेशी सामान की मौजूदगी के बीच मिट्टी के उत्पाद परंपरा को जीवित रखने के साथ रेहड़ी-फड़ी और छोटे कारोबारियों की आजीविका का सहारा बने हुए हैं। पुरानी और नई पीढ़ी मिलकर मिट्टी की इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ा रही है।
30 साल से मिट्टी से चल रही आजीविका
सरकाघाट निवासी जीवन राम और उनकी पत्नी ईश्वरो देवी पिछले 30 वर्ष से लाल मिट्टी के दीये, कलश, आरती और घड़े बनाकर आजीविका चला रहे हैं। जीवन राम ने बताया कि वे अपने उत्पाद चौहाटा बाजार में बेच रहे हैं। छोटे और बड़े कलश 25 से 30 रुपये में बिक रहे हैं। मिट्टी के दीये 30 से 50 रुपये के बीच उपलब्ध हैं।
25 साल का युवा बढ़ा रहा परंपरा को आगे
इंदिरा मार्केट में पंडोह से आए 25 वर्षीय भीम सिंह भी पारिवारिक परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।
पहले उनकी माताजी यह काम करती थीं। उनके निधन के बाद अब भीम सिंह मिट्टी के उत्पाद बेच रहे हैं। उनके यहां बड़ा कलश 50 रुपये, छोटा 30 रुपये व छह दीये 50 रुपये में मिल रहे हैं।
करवा व पूजा का अन्य सामान भी
दीयों के साथ करवाचौथ के लिए करवा और पूजा का अन्य सामान भी बाजार में आ गया है। कारीगरों ने लोगों से बड़े शोरूम के बजाय स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों से खरीदारी की अपील की है।
जगह के अभाव से निराशा
व्यापारियों ने बताया कि त्योहारी सीजन में सामान बेचने और बैठने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती। उन्हें एक-दूसरे से तालमेल बिठाकर बैठना पड़ता है, जिससे व्यापार और दैनिक रोजगार प्रभावित होता है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से उचित और पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराने की मांग की है।
