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जॉब सीकर नहीं, क्रिएटर बन रहा देश का युवा; IIT मंडी की रिपोर्ट- 20% से अधिक छात्रों का नौकरी के बजाय स्टार्टअप पर जोर

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 21 Oct 2026 05:52 PM (IST)Updated: Wed, 21 Oct 2026 06:49 PM (IST)

आईआईटी मंडी और रेवा विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय युवा अब नौकरी ढूंढने के बजाय उद्यमी बनने की ओर अग्रसर हैं।

विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025 जारी करते आईआईटी मंडी के सहायक प्रोफेसर पूरन सिंह व अन्य। सौ. आईआईटी

विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025 जारी करते आईआईटी मंडी के सहायक प्रोफेसर पूरन सिंह व अन्य। सौ. आईआईटी

HighLights

  1. 20% से अधिक छात्र अब उद्यमी बन रहे हैं।

  2. सरकारी नौकरी का क्रेज युवाओं में घटा है।

  3. युवाओं में तुरंत व्यवसाय शुरू करने की चाह बढ़ी।

जागरण संवाददाता, मंडी। पारंपरिक रूप से नौकरी पाने की चाह रखने वाला भारतीय युवा अब नौकरी देने वाला यानी उद्यमी बनने की राह पर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) मंडी द्वारा बेंगलुरु के रेवा विश्वविद्यालय के सहयोग से जारी विद्यार्थी उद्यमिता संबंधी राष्ट्रीय सर्वेक्षण रिपोर्ट 2025 में चौंकाने वाले और बेहद उत्साहजनक आंकड़े सामने आए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 20 प्रतिशत से अधिक कालेज विद्यार्थियों ने अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर दिया है, जो कि वैश्विक औसत (23 प्रतिशत) के लगभग बराबर है।

सरकारी नौकरी का घटा क्रेज, पढ़ाई के तुरंत बाद बिजनेस की चाह

देश के 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1200 से अधिक उच्च शिक्षण संस्थानों के 25783 विद्यार्थियों पर किए गए इस व्यापक सर्वेक्षण से यह बात सामने आई है कि देश के हर 100 में से 43 विद्यार्थी अपना उद्यम शुरू करना चाहते हैं। खास बात यह है कि अब छात्र पढ़ाई पूरी होने के तुरंत बाद व्यवसाय शुरू करने को प्राथमिकता दे रहे हैं।

वर्ष 2023 के मुकाबले 2025 में पढ़ाई के तुरंत बाद व्यवसाय शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवाओं का आंकड़ा 14 प्रतिशत से बढ़कर 16.2 प्रतिशत हो गया है। इसके उलट, सुरक्षित मानी जाने वाली सरकारी नौकरी के प्रति युवाओं का रुझान घटा है।

सरकारी नौकरी चाहने वालों का अनुपात 12.7 प्रतिशत से लुढ़क कर 10.1 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि बड़ी कंपनियों में नौकरी की इच्छा रखने वाले छात्र भी 31.3 प्रतिशत से घटकर 27.4 प्रतिशत रह गए हैं।

रिस्क लेने से पीछे नहीं हट रहे युवा, एक से ज्यादा बिजनेस का संचालन

भारतीय युवा अब असफलता से डरने के बजाय उससे सीखकर दोबारा आगे बढ़ने का माद्दा रखते हैं। नियमित बिक्री करने वाले विद्यार्थी उद्यमों में से 31 प्रतिशत की स्थापना अकेले वर्ष 2025 में हुई, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 18 प्रतिशत है। इसके अलावा, भारत के 42 प्रतिशत विद्यार्थी उद्यमी एक साथ दो या उससे अधिक व्यवसाय संचालित कर रहे हैं, जबकि वैश्विक औसत मात्र 25 प्रतिशत है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी इंगित करती है कि छात्रों में आइटी, एआइ और डिजिटल सेक्टर का क्रेज सबसे ज्यादा है, लेकिन धरातल पर ऐसे डिजिटल बिजनेस फिलहाल सिर्फ 10 प्रतिशत ही संचालित हो रहे हैं।

रोल मॉडल की बड़ी भूमिका और आगे की राह

रिपोर्ट के प्रमुख लेखक और आइआइटी मंडी के सहायक प्रोफेसर डा. पूरन सिंह का कहना है कि जिन विद्यार्थियों के परिवार या परिचितों में कोई उद्यमी होता है, उनके खुद का व्यवसाय शुरू करने की संभावना तीन गुना तक बढ़ जाती है। हालांकि, भारत में आधे छात्रों के पास ऐसा कोई पारिवारिक बैकग्राउंड नहीं है, इसलिए उच्च शिक्षण संस्थानों को आगे आकर ऐसा माहौल देना होगा। अब विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों को व्यावहारिक रूप से पहला ग्राहक ढूंढने और स्टार्टअप को सफल बनाने के लिए प्रेरित करना है।

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