घाटे से उबरने लगा HRTC, ई-बसों के संचालन से लाखों रुपये का मुनाफा; प्रति किलोमीटर कितनी बचत?
हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) मंडी जिले में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रहा है, ...और पढ़ें

ई-बसों के संचालन से एचआरटीसी की लागत में कमी आई है व मुनाफा बढ़ा है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
मंडी में ई-बसों से एचआरटीसी को 19.32 लाख का मुनाफा।
प्रति किलोमीटर 12-13 रुपये की बचत, परिचालन लागत घटी।
ई-बसें पर्यावरण संरक्षण और निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत कर रहीं।
संवाद सहयोगी, मंडी। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रदेश सरकार की पहल मंडी जिले में बेहद सफल सिद्ध हो रही है। जिला को मिली 25 नई इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से जहां यात्रियों को आधुनिक और आरामदायक सफर की सुविधा मिल रही है, वहीं निगम की परिचालन लागत में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
मंडी और सुंदरनगर डिपो में मात्र 24 दिनों के भीतर ई-बसों के संचालन से निगम को 19.32 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है।
मंडी की 15 ई-बसों पर कितना खर्च
इस अवधि में मंडी डिपो की 15 ई-बसों ने 60,060 किलोमीटर का सफर तय किया, जिस पर 7.95 लाख रुपये का चार्जिंग खर्च आया, जबकि इतनी ही दूरी के लिए डीजल बसों पर 19.30 लाख रुपये व्यय होते, जिससे डिपो को 11.34 लाख रुपये का लाभ मिला।
सुंदरनगर डिपो की स्थिति
इसी प्रकार सुंदरनगर डिपो में 10 ई-बसों ने 35,044 किलोमीटर दूरी तय कर 2.10 लाख रुपये की बिजली खर्च की, जबकि डीजल का व्यय 10.08 लाख रुपये बैठता, जिससे डिपो को 7.97 लाख रुपये का सीधा लाभ प्राप्त हुआ।
प्रति किलोमीटर कितनी बचत
पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में बिजली की कम लागत के कारण निगम को प्रति किलोमीटर लगभग 12 से 13 रुपये की बड़ी बचत हो रही है।
इन रूट पर चल रहीं बसें
वर्तमान में ये ई-बसें मंडी-शिमला, मंडी-चंडीगढ़, मंडी-पालमपुर जैसे महत्वपूर्ण लंबे मार्गों के साथ-साथ अनेक स्थानीय मार्गों पर सफलतापूर्वक सेवाएं दे रही हैं। बसों के सुचारू संचालन के लिए मंडी बस स्टैंड, वर्कशाप और सुंदरनगर में चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा चुके हैं तथा जंजैहली में नया स्टेशन प्रस्तावित है।
शून्य प्रदूषण और घटती परिचालन लागत के साथ यह पहल निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण दोनों ही दिशाओं में एक मील का पत्थर साबित हो रही है।
