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पहाड़ों की कठिन राह हिमाचल के 4 फोरलेन प्रोजेक्ट ने की आसान, ट्रेन भी बिलासपुर से आगे बढ़ने को तैयार

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Fri, 23 Oct 2026 06:35 AM (GMT+05:30)

हिमाचल प्रदेश आधुनिक इंजीनियरिंग क्रांति के माध्यम से अपनी कठिन भौगोलिक बाधाओं को पार कर रहा है। फोरलेन परियोजनाओं, रेल ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश में फोरलेन और रेलवे प्रोजेक्ट रफ्तार पकड़ रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश में फोरलेन और रेलवे प्रोजेक्ट रफ्तार पकड़ रहे हैं।

HighLights

  1. फोरलेन परियोजनाओं ने सफर का समय आधा कर दिया है।

  2. भानुपल्ली बिलासपुर बैरी रेल लाइन का काम युद्धस्तर पर जारी।

  3. रोपवे और हेली-टैक्सी ने दुर्गम क्षेत्रों को सुगम बनाया।

जागरण संवाददाता, मंडी। कभी बादलों के पार अटके रास्तों और कुदरत की बंदिशों से जूझने वाला हिमाचल प्रदेश आज आधुनिक इंजीनियरिंग क्रांति का गवाह बन रहा है। ऊंचे दर्रों, गहरी खाइयों और बारह महीने मौसम की मार झेलने वाले इस पहाड़ी राज्य ने अपनी सीमाओं को लांघकर विकास की ऐसी गति पकड़ी है, जिसने पहाड़ों के मिजाज को ही बदल दिया है।

फोरलेन परियोजनाओं ने आसान किया सफर

सड़क संपर्क के मोर्चे पर कीरतपुर-मनाली, कालका-शिमला, पठानकोट-मंडी, शिमला-मटौर फोरलेन परियोजनाएं इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना हैं। उन्नत सुरंगों और विशालकाय पुलों ने जानलेवा तीखे मोड़ों को खत्म कर सफर का समय आधा कर दिया है। सेब बागवानों की मंडियों तक पहुंच आसान हुई है और पर्यटन को नए पंख लगे हैं। 

ट्रेन नेटवर्क हो रहा मजबूत

पटरी पर दौड़ती उम्मीदों के तहत भानुपल्ली बिलासपुर बैरी रेल लाइन का काम युद्धस्तर पर जारी है, जो भविष्य में सामरिक दृष्टि से अहम बिलासपुर-मनाली-लेह रेललाइन की आधारशिला बनेगी। ऊना में दौलतपुर चौक तक ट्रेन पहुंच रही है। 

रोपवे नेटवर्क ने भी आसान की राह

हवाई और केबल नेटवर्क के क्षेत्र में हिमाचल ने लंबी छलांग लगाई है। पर्वतमाला परियोजना के तहत प्रस्तावित और निर्मित आधुनिक रोपवे नेटवर्क न केवल शिमला, धर्मशाला और मनाली जैसे शहरों में ट्रैफिक जाम का ईको-फ्रेंडली समाधान बन रहे हैं, बल्कि धार्मिक स्थलों और दुर्गम चोटियों तक पहुंच को भी सुगम बना रहे हैं।

हेली टैक्सी दुर्गम क्षेत्र लाई पास

हेलीटैक्सी सेवा ने पांगी, भरमौर और किन्नौर जैसे दूरदराज क्षेत्रों को सीधे राज्य की मुख्यधारा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ दिया है। फोरलेन की गति, रेल का विस्तार, रोपवे की सुगमता और हेलीटैक्सी की उड़ान यह चौतरफा कनेक्टिविटी देवभूमि हिमाचल को एक सशक्त, पर्यावरण-संवेदनशील और आधुनिक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रही है।

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