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हिमाचल के फोरलेन और हाईवे पर रात का सफर होगा सुरक्षित, NHAI स्थापित करेगा आधुनिक CCMS तकनीक

By Hansraj Saini Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 22 Oct 2026 06:39 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश के प्रमुख फोरलेन और हाईवे पर अब आधुनिक केंद्रीकृत नियंत्रण और निगरानी प्रणाली (CCMS) तकनीक स्थापित की जा रही है।

हिमाचल के फोरलेन और हाईवे पर रात का सफर सुरक्षित होगा। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल के फोरलेन और हाईवे पर रात का सफर सुरक्षित होगा। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. प्रमुख फोरलेन पर आधुनिक CCMS तकनीक स्थापित की जा रही है।

  2. यह प्रणाली रात में ड्राइविंग को सुरक्षित और सुगम बनाएगी।

  3. ऊर्जा की बचत होगी और बिजली बिलों में कमी आएगी।

हंसराज सैनी, मंडी। हिमाचल प्रदेश में सड़क सुरक्षा और यातायात को सुगम व सुरक्षित बनाने की दिशा में नई शुरुआत होने जा रही है। प्रदेश के प्रमुख फोरलेन मार्गों और पहाड़ी रास्तों पर अब पारंपरिक प्रकाश व्यवस्था के दिन लदने वाले हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) की पहल पर प्रदेश के सभी प्रमुख हाईवे और फोरलेन पर आधुनिक केंद्रीकृत नियंत्रण और निगरानी प्रणाली (सीसीएमएस) तकनीक स्थापित की जा रही है।

इस योजना के तहत दुर्गम पहाड़ी मार्गों पर लाइटिंग की पूरी व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और रिमोट-नियंत्रित बनाया जाएगा, जिससे रात के समय यात्रा करने वाले वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी।

इन प्रमुख हाईवे पर बिछेगा तकनीक का जाल

यह अत्याधुनिक तकनीक प्रदेश की जीवनरेखा कहे जाने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर चरणबद्ध तरीके से लागू की जा रही है। इनमें कीरतपुर-मनाली, चंडीगढ़-शिमला, पठानकोट-मंडी और शिमला-मटौर जैसे व्यस्त फोरलेन मार्ग शामिल हैं। इन सभी महत्वपूर्ण मार्गों पर सीसीएमएस प्रणाली स्थापित करने की टेंडर प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। 

इसके अलावा पांवटा साहिब मार्ग पर भी इस हाई-टेक तकनीक को स्थापित करने की तैयारियां जोरों पर हैं, ताकि राज्य के हर कोने में सड़क आवागमन को और अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाया जा सके। पांवटा साहिब से हेवना (एनएच-707) खंड पर कुल 354 एलईडी लाइट लगाई जाएंगी, जिनके संचालन के लिए 14 सीसीएमएस पैनल स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए मोर्थ ने निविदा आमंत्रित की है। यह कार्य विश्व बैंक की सहायता से चल रहे ग्रीन नेशनल हाईवे कारिडोर प्रोजेक्ट (जीएनएचसीपी) के अंतर्गत किया जा रहा है।

सीसीएमएस प्रणाली की विशेषताएं

यह पूरी प्रणाली अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगी। इससे बिजली के रखरखाव और ऊर्जा की खपत पर पैनी नजर रखी जा सकेगी

सूर्यास्त और सूर्योदय के अनुसार स्वतः संचालन

स्ट्रीट लाइटें अब किसी मैनुअल स्विच की मोहताज नहीं होंगी। यह भौगोलिक स्थिति के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के आधार पर पूरी तरह स्वतः (आटोमैटिक) आन और आफ होंगी। इसके साथ ही, किसी भी आपात स्थिति या आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से भी इन्हें देश या राज्य के किसी भी कोने से कभी भी संचालित किया जा सकेगा।

12 घंटे का बैकअप और रियल-टाइम अलर्ट

पहाड़ी रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था को चाकचौबंद रखने के लिए इस सिस्टम में कम से कम 12 घंटे का पावर बैकअप होगा। यदि मार्ग पर कहीं भी बिजली गुल होती है, वोल्टेज में उतार-चढ़ाव आता है, ओवर-करंट की समस्या होती है, या फिर किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ अथवा केबल चोरी की कोशिश होती है, तो पलक झपकते ही संबंधित अधिकारियों और रखरखाव टीम के मोबाइल फोन पर अलर्ट एसएमएस बज उठेगा।

बिजली की बचत और बिल में कमी

इस डिजिटल प्रणाली के माध्यम से ऊर्जा की खपत का सटीक डेटा प्राप्त होगा। इससे बिजली की बर्बादी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा, रखरखाव में लगने वाले समय में भारी कमी आएगी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिजली के बिल में भी उल्लेखनीय कमी आएगी। अभी चारों मार्गों पर एनएचएआइ को हर माह पांच से छह लाख रुपये मासिक बिल आ रहा है।

हिमाचल के प्रमुख फोरलेन पर आधुनिक सीसीएमएस तकनीक स्थापित की जा रही है। इससे स्ट्रीट लाइटें सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार स्वतः ऑन-ऑफ होंगी। तकनीकी खराबी या आपात स्थिति में अधिकारियों के मोबाइल पर तुरंत अलर्ट पहुंचेगा। इससे ऊर्जा की बचत होगी और बिजली बिलों में कमी आएगी।
-दिगव्रत सिंह, उपमहाप्रबंधक, एनएचएआई मंडी।

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