संवाद सहयोगी, मंडी : निजी बस ऑपरेटर बस किराये में बढ़ोतरी की मांग को लेकर दस सितंबर से हड़ताल पर जा रहे हैं। चेतावनी दी है कि हड़ताल के दौरान टैक्सी ट्रेवलर भी नहीं चलने देंगे। बस ऑपरेटरों की मांग है कि किराये में पचास फीसद बढ़ोतरी की जाए। न्यूनतम किराया दस रुपये किया जाए। इसके पीछे यह तर्क दिया है कि डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिस कारण वे घाटे में जा रहे हैं। सरकार अगर किराया बढ़ाती है तो इसका आम जनता पर क्या असर पड़ेगा, न्यूनतम किराया दस रुपये करने की मांग कहां तक उचित है, इन सभी बिंदुओं पर आम जनता ने अपनी-अपनी राय दी है।

पेश हैं कुछ अंश:-

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अपने अधिकारों के लिए लड़ना सभी का हक है। निजी बसों में किराये की बढ़ोतरी के लिए चक्का जाम किया जा सकता है। आजकल तेल की बढ़ती हुई कीमतों के कारण किराए को बढ़ाने की मांग जायज भी है, लेकिन न्यूनतम किराया दस रुपये करने की मांग उचित नहीं है। दस रुपये किराया करने से बस ऑपरेटर तो लाभ में आ जाएंगे, लेकिन आम आदमी पर भारी बोझ पड़ेगा।

संतोष कुमार नेरचौक

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दस रुपये किराया कर देना कहीं से भी उचित नहीं होगा। थोड़ी दूरी का सफर करने पर भी अगर दस रुपये देने पड़ेंगे तो बहुत मुश्किल हो जाएगी। लंबी दूरी का भी अगर किराया मात्र दस रुपये ही होगा तब हो सकता है। फिर लोगों को सफर करने के लिए बसों में दो किलोमीटर के लिए भी दस रुपये ही देने पड़ेंगे। इससे गरीब जनता की जेब किराया देने में ही खाली हो जाएगी। जो लोग रोजाना सफर करते हैं उनको नुकसान झेलना पड़ेगा।

मलका देवी, सुंदरनगर

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डीजल के दामों बढ़ोतरी के दौरान निजी बसों की हड़ताल जायज है लेकिन जिस तरीके से वह किराया बढ़ाने की की सोच रहे हैं, वह फैसला गरीबों के हक में नहीं है। सरकार को इस ओर ठोस कदम उठाकर डीजल व पेट्रोल की कीमतें कम करनी चाहिए।।

श्याम देवी, कांगरू बग्गी।

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अगर सरकार डीजल की कीमतों पर रोक नहीं लगाई पाई तो निजी बसों व टैक्सियों के किराये में बहुत बड़ी बढ़ोतरी की जाएगी। निजी बसों के किराये में इतनी बढोतरी होगी जिसका खामियाजा मेहनत मजदूरी करने वाले गरीब लोगों को भुगतना पड़ेगा। निजी बस ऑपरेटरों को अपना पक्ष रखना चाहिए लेकिन इस तरह हड़ताल करके नहीं।

लुदर मणि बग्गी

Posted By: Jagran