विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

BBMB भाखड़ा और पौंग बांध से हटाएगा गाद, डैम में आए झुकाव के बाद लिया गया निर्णय; अपनाएंगे खास तकनीक

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 23 Apr 2026 02:18 PM (IST)

भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) ने भाखड़ा और पौंग बांधों से दशकों से जमी गाद हटाने के लिए एक बड़ा ...और पढ़ें

भाखड़ा बांध से बीबीएमबी सिल्ट यानी गाद बाहर निकालेगा।

भाखड़ा बांध से बीबीएमबी सिल्ट यानी गाद बाहर निकालेगा।

HighLights

  1. BBMB भाखड़ा, पौंग बांधों से गाद हटाएगा।

  2. पिछले साल भाखड़ा बांध में झुकाव दर्ज हुआ।

  3. आधुनिक डीप ड्रेजिंग तकनीक का होगा उपयोग।

हंसराज सैनी, मंडी। उत्तर भारत की जीवनरेखा माने जाने वाले भाखड़ा और पौंग बांधों के अस्तित्व को बचाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा अभियान प्रारंभ होने जा रहा है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने दशकों से जमी गाद की समस्या से निपटने के लिए दोनों बांधों के जलाशयों में डीप ड्रेजिंग का निर्णय लिया है। इसके लिए बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को आमंत्रित किया है।

पिछले वर्ष पानी के दबाव के कारण भाखड़ा बांध में झुकाव सामान्य स्तर से 1.03 इंच से अधिक दर्ज किया था। संभावित खतरे को भांपते हुए बीबीएमबी ने बीएसएल प्रोजेक्ट को लगभग एक माह के लिए बंद किया था, जिससे पानी की आपूर्ति रोक दी थी। बांध का जलस्तर 1673.24 फीट से घटाकर 1650 फीट तक लाया गया था।

दैनिक जागरण ने गाद और पानी के दबाव से भाखड़ा बांध के झुकाव का मामला प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद केंद्र और पंजाब सरकार ने बीबीएमबी से रिपोर्ट मांगी और कारगर कदम उठाने के निर्देश दिए थे। 25 फरवरी को दोनों बांधों की सुरक्षा के लिए बीबीएमबी ने आइआइटी रुड़की के साथ तकनीकी सहायता के लिए करार किया था।

आधुनिकतम तकनीक से निकाली जाएगी गाद

सतलुज नदी पर वर्ष 1963 में बने भाखड़ा और ब्यास नदी पर 1975 में बने पौंग बांध में जमा गाद को आधुनिकतम तकनीक से निकाला जाएगा। हिमालयी क्षेत्रों से आने वाली नदियों के साथ हर साल भारी मात्रा में गाद आती है। 

कितनी गाद आ रही हर साल

आंकड़ों के अनुसार, भाखड़ा में प्रतिवर्ष 35-40 मिलियन क्यूबिक मीटर (एमसीएम) और पौंग में लगभग 25 एमसीएम गाद जमा हो रही है। इससे न केवल बिजली उत्पादन प्रभावित हो रहा है, बल्कि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की क्षमता भी घट रही है।

क्रिटिकल जोन में ड्रेजिंग 

इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती जलाशयों की गहराई है। भाखड़ा में 1500 फीट और पौंग में 1300 फीट से नीचे के क्रिटिकल जोन में ड्रेजिंग की जानी है। इसके लिए बोर्ड ऐसी वैश्विक एजेंसियों की तलाश कर रहा है जिनके पास रोबोटिक ड्रेजिंग के लिए पानी के अत्यधिक दबाव में काम करने वाले रिमोट कंट्रोल उपकरण और कठोर गाद को काटकर बाहर निकालने वाले कटर सक्शन ड्रेजर हों। पौंग बांध जलाशय में संवेदनशील वेटलैंड इकोसिस्टम को नुकसान पहुंचाए बिना गाद निकासी का कार्य किया जाएगा।

क्या कहते हैं बीबीएमबी चेयरमैन

बीबीएमबी के चेयरमैन मनोज त्रिपाठी के अनुसार, इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य बाजार में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ तकनीक का आकलन करना है। इसके बाद प्राप्त फीडबैक के आधार पर मुख्य टेंडर जारी किया जाएगा। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली जैसे राज्यों को जलापूर्ति और बिजली की निरंतरता भी सुनिश्चित होगी।

यह भी पढ़ें: शिमला के लेंस्कार्ट शोरूम में हंगामा, हिंदू संगठनों ने किया हनुमान चालीसा पाठ; कर्मियों को तिलक लगाया व कलावा पहनाया