चौहारघाटी के बजीर देव पशाकोट भी अपने मूल मंदिर से हुए रवाना

सहयोगी, पद्धर : जिला प्रशासन के निमंत्रण पर चौहारघाटी हस्तपुर (हस्तिनापुर) नरेश बड़ादेव हुरंग काली नारायण शिवरात्रि महापर्व में भाग लेने के लिए अपने मंदिर से 28 फरवरी को मंडी के लिए रवाना होंगे। वहीं, चौहारघाटी के बजीर नाम से विख्यात अराध्य देव पशाकोट अपने मूल मंदिर से रवाना हो गए हैं। देव पशाकोट इस बार झटींगरी से सीधे घोघरधार होकर प्रवेश करेंगे और श्रद्धालुओं द्वारा आयोजित जातर में शामिल होंगे। ऐसे में कधार, उरला, गवाली व डलाह पंचायत के लोगों को देवता के दर्शन शिवरात्रि से लौटते समय होंगे।

बड़ादेव हुरंग नारायण बल्ह से डायनापार्क होते हुए नारला पहुंचेंगे और यहां से मंडी के लिए रवाना होंगे।

रथ के समक्ष सजती है हुरंग नारायण की अदालत

विवादित मामलों के निपटारे और न्याय के लिए देव हुरंग नारायण की अदालत आज भी देव समाज का मुख्य हिस्सा बनी हुई है। वाद-विवाद के समझौते और न्याय के लिए भारी संख्या में लोग देवता के रथ के समक्ष हाजिरी भरते हैं। ऐसे मामलों में देवता के मुख्य कारदार नड़वेदी पंडित सहित गूर व पुजारी वकील की भूमिका निभाकर देव रथ के समक्ष मंत्रोच्चारण के माध्यम से राजीनामा करवाते हैं। देव हुरंग नारायण की अदालत चाहे हार दौरा हो, शिवरात्रि पर्व हो या काहिका उत्सव हमेशा लगी रहती है। इस बार देवता के मुख्य कारदारों में पुजारी गूर शुंकू राम, वर्षा की देवी परमेश्वरी के गूर राजू राम, दुमच भादर ¨सह व लेखराम, नड़वेदी पंडित सोमनाथ, भंडारी लजे राम, पुरोहित हंसराज शर्मा मुख्य कारदारों के रूप में सेवाएं देंगे। अन्य कारदारों की सेवा भी इनके आदेशानुसार देव हुरंग नारायण लेते हैं। देव कारदारों की सेवा घाटी की सुधार, रोपा, कथोग, बल्ह टिक्कर पंचायत से देव हुरंग नारायण लेते हैं।

देव हुरंग नारायण धूमपान के हैं विरोधी

देवता के रथ के पास गलती से भी धूमपान सामग्री ले जाना दंडनीय अपराध है। लोगों को सचेत करने के लिए देव रथ के साथ धूमपान निषेध का बोर्ड लगाया है। प्रदेश सरकार ने भले ही मंदिरों, सार्वजनिक स्थानों पर धूमपान पर रोक लगा रखी है लेकिन हुरंग नारायण के दरबार में यह प्रथा बहुत प्राचीन है। देवरथ के पास शराब की पाबंदी नहीं है। धूमपान सामग्री देव रथ तक ले जाने वालों को देवता अपने गुरों और कारदारों के माध्यम से दंड सुनाते हैं। इसकी भरपाई गलती करने वालों को तत्काल करनी होती है।

भगवान श्री कृष्ण का अवतार माने जाते हैं देव हुरंग नारायण

धरती लोक में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार गवाले के रूप में हुआ था। इसी प्रकार देव हुरंग काली नारायण की बाल लीला भी गवाले के रूप में प्रदर्शित रही है। घोघरधार की पहाड़ी पर पत्थर से हिमरी गंगा की विशाल जलधारा की उत्पति जो नारला के पास विशाल झरने के रूप में देखी जा सकती है हुरंग काली नारायण की बाल लीला के समय का चमत्कार है। उस समय हुरंग नारायण नारला स्नेड गांव में किसी बुढि़या के पास गाय चराते थे।