हंसराज सैनी, मंडी

खाना खिलाते समय खाद्य सामाग्री कम पड़ जाती है तो इस स्थिति को एक पहाड़ी कहावत के अनुसार रसोई टूटना कहा जाता है। लेकिन मध्याह्न भोजन की रसोई अब नहीं टूटेगी क्योंकि केंद्र ने इसके लिए माकूल इंतजाम कर दिए हैं।

प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों में चावल का कोटा अब मिड-डे मील में बाधा नहीं बनेगा। सरकार की ओर से कोटा जारी करने से चावल का टोटा दूर हो गया है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के प्राथमिक शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के लिए प्रदेश को मिड-डे मील योजना के तहत 34963.90 क्विंटल खाद्यान्न (चावल) का कोटा आवंटित कर दिया है। मंत्रालय से कोटा आवंटित होने के बाद शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक व नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से स्कूलों को चावल आवंटन करने के आदेश जारी कर दिए हैं। प्रदेश के 15174 सरकारी शिक्षण संस्थानों में मिड-डे मील योजना चल रही है। इसमें 10673 प्राइमरी व 4501 अप्पर प्राइमरी स्कूल शामिल हैं। प्राइमरी में 375035 तथा अप्पर प्राइमरी में 264490 छात्र-छात्राओं के लिए रोजाना मिड-डे मील तैयार होता है। प्राइमरी स्कूलों के लिए 19110.90 व अप्पर प्राइमरी के 15853 क्विंटल चावल आवंटित हुआ है। 34963.90 क्विंटल चावल में मंडी जिला को 5084.85, कांगड़ा 5269.96, बिलासपुर 1666.82, चंबा 4132.15, हमीरपुर 1621.53, किन्नौर 380.94, कुल्लू 2640.95, लाहुल-स्पीति 154.67, शिमला 3870.57, सिरमौर 4623.65, सोलन 2998.42 तथा ऊना जिला के 2530.19 क्विंटल चावल जारी किया गया है। प्राइमरी स्कूलों के लिए 100 ग्राम व अप्पर प्राइमरी के लिए 150 ग्राम प्रति विद्यार्थी के हिसाब से चावल का आवंटन किया गया है। चावल का कोटा समय पर स्वीकृत होने से स्कूलों में मिड-डे मील का चार्ज संभाल रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। शिक्षकों को अब उधारी के चावल से काम नहीं चलाना पड़ेगा। पिछले दो माह से कई शिक्षण संस्थानों को चावल का कोटा नहीं मिला था। शिक्षक निजी दुकानों या फिर दूसरे शिक्षण संस्थानों से चावल उधार लेकर मिड-डे मील का काम चला रहे थे। प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अशोक शर्मा ने प्रदेश के 15174 सरकारी शिक्षण संस्थानों के लिए चौथी तिमाही के चावल का 34963.90 क्विंटल कोटा केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से स्वीकृत होने की पुष्टि की है।

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