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कुल्लू और लाहुल-स्पीति में 8 स्टोन क्रशर का अवैध संचालन, एनजीटी में याचिका दायर; वन भूमि पर चलाने का आरोप

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 27 Sep 2026 12:59 PM (IST)

कुल्लू और लाहुल-स्पीति में आठ स्टोन क्रशर के अवैध संचालन को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की गई है, जिससे मामला गरमा गया है।

कुल्लू और लाहुल-स्पीति में स्टोन क्रशर को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की गई है। प्रतीकात्मक फोटो

कुल्लू और लाहुल-स्पीति में स्टोन क्रशर को लेकर एनजीटी में याचिका दायर की गई है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. कुल्लू-लाहुल में आठ स्टोन क्रशर पर एनजीटी में याचिका।

  2. बिना मंजूरी वन भूमि पर क्रशर चलाने का आरोप।

  3. पर्यावरण और सरकारी राजस्व पर गंभीर असर की आशंका।

संवाद सहयोगी, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में कुल्लू और लाहुल-स्पीति की संवेदनशील पहाड़ी भूमि में संचालित आठ स्टोन क्रशर को लेकर एनजीटी में 12 मई 2026 को याचिका दायर होने से मामला गरमा गया है। याचिका में दो निर्माण कंपनियों पर वन भूमि में आवश्यक मंजूरियों के बिना क्रशर चलाने व सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर निर्माण सामग्री की आपूर्ति करने के आरोप लगाए गए हैं।

याचिकाकर्ता ने सामग्री की आपूर्ति का अनुमानित मूल्य 30 लाख रुपये प्रतिदिन से अधिक बताया है। मामला कुल्लू जिले के मनाली क्षेत्र के धुंधी व बुरुआ तथा लाहुल-स्पीति के केलिंग सराय, चिका पालमो, कोकसर, गुए, जिंगजिंगबार और रोली स्थित क्रशरों से जुड़ा है।

नहीं ली वैधानिक मंजूरियां

याचिकाकर्ता अभिषेक राय ने आरोप लगाया कि इन इकाइयों के संचालन के लिए वन, खनन व प्रदूषण नियंत्रण विभाग समेत संबंधित वैधानिक मंजूरियां नहीं ली गईं। इसकी पहली सुनवाई अगस्त में हुई जिसमें कोर्ट की ओर से वकील की मांग की है। अब अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।

10 साल के आंकड़ों की हो जांच

उन्होंने क्रशरों से निकाली और बीआरओ को आपूर्ति की गई निर्माण सामग्री की मात्रा तथा जमा की गई रायल्टी का मिलान कराने की मांग भी की है। साथ ही 10 वर्षों में दोनों कंपनियों के वार्षिक उत्पादन और उन्हें मिली वैधानिक अनुमतियों की जांच की मांग उठाई गई है।

निर्धारित दूरी के भीतर लगे कई क्रशर

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कुछ क्रशर नदी या नालों से निर्धारित दूरी के भीतर संचालित हो रहे हैं। जबकि कुछ वायु प्रदूषण अधिक फैला रहे हैं। इससे वन भूमि, हिमालयी पर्यावरण और सरकारी राजस्व पर असर पड़ने की आशंका है। बीआरओ के लिए विशेष अनुमति के नाम पर स्थायी क्रशर चलाए जा रहे हैं। 

एनजीटी ने फिलहाल याचिकाकर्ता से शिकायतों का पूरा विवरण, कथित उल्लंघनकर्ताओं और प्रभावित भूमि की जानकारी तथा आरोपों के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। याचिकाकर्ता अभिषेक राय कहा कि आवश्यक तथ्यों और दस्तावेजों के साथ नई याचिका दाखिल करने की बात कही है।

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