1800 करोड़ मिलने के बाद SKTT सड़क निर्माण में देरी क्यों? पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने सुक्खू सरकार को घेरा
पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने ₹1800 करोड़ स्वीकृत SKTT सड़क परियोजना में देरी पर सुक्खू सरकार से जवाब मांगा है। ...और पढ़ें

सुक्खू सरकार से सड़क प्रोजेक्ट देरी पर पूर्व विधायक ने पूछे सवाल।
HighLights
SKTT सड़क परियोजना के लिए ₹1800 करोड़ स्वीकृत
रवि ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर निर्माण में देरी का आरोप
भूमि अधिग्रहण और उचित मुआवजे की तत्काल मांग
जागरण संवाददाता, केलंग। संसारी खिलाड़ थिरोट तांदी (एसकेटीटी) सड़क परियोजना के लिए केंद्र सरकार द्वारा 1800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने के बावजूद निर्माण और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में हो रही देरी को लेकर पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रवि ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर सवाल उठाए हैं।
रवि ठाकुर ने कहा कि एसकेटीटी सड़क सीमावर्ती क्षेत्रों की कनेक्टिविटी, सामरिक सुरक्षा और स्थानीय विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। केंद्र द्वारा इतनी बड़ी राशि स्वीकृत किए जाने के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन को भूमि अधिग्रहण, मुआवजा निर्धारण और औपचारिकताओं को तेजी से पूरा करना चाहिए।
पूर्व विधायक ने सुक्खू सरकार से किए सवाल
प्रशासनिक देरी के कारण सीमावर्ती क्षेत्र की जनता विकास के लाभ से वंचित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि प्रभावित भूमि का मुआवजा केलंग में लागू सर्कल रेट, भूमि की श्रेणी और कानून के निर्धारित मानदंडों के अनुसार तय किया जाए।
जिन परिवारों के मकान, गौशालाएं, दुकानें और अन्य संरचनाएं प्रभावित हो रही हैं, उनका भी उचित मूल्यांकन कर नियमानुसार मुआवजा दिया जाए। रवि ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्व एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी और स्थानीय विधायक अनुराधा राणा से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।
1800 करोड़ मंजूर होने के बाद भी क्यों नहीं बनी सड़क
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आवश्यक दस्तावेज और मुआवजे से संबंधित प्रस्ताव शीघ्र केंद्रीय प्राधिकरण को भेजे, लंबित औपचारिकताएं पूरी करे और सड़क निर्माण के लिए समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करे।
उन्होंने कहा कि जब केंद्र सरकार 1800 करोड़ स्वीकृत कर चुकी है, तो प्रदेश सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए प्रक्रियाओं में तेजी लानी चाहिए। सड़क निर्माण में देरी का नुकसान सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों को नहीं उठाना चाहिए।
विकास तभी सार्थक होगा जब सड़क का निर्माण आगे बढ़े और प्रभावित परिवारों को उनकी भूमि और परिसंपत्तियों का उचित मुआवजा मिले।
हमारी मांग स्पष्ट है - उचित मुआवजा निर्धारण, शीघ्र मूल्यांकन और एसकेटीटी निर्माण प्रक्रिया को तत्काल आगे बढ़ाया जाए। लाहौल-स्पीति की जनता को अब ठोस कार्रवाई चाहिए।
यह भी पढ़ें- हिमाचल प्रदेश में ट्रांसफर के लिए नई व्यवस्था बना रही सरकार, कब हटेगा प्रतिबंध? हजारों आवेदन हैं पेंडिंग
