विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कुल्लू की पार्वती घाटी: ट्रैकिंग पर गए और फिर नहीं लौटे, 2 पर्यटक एक महीने से लापता; आखिर क्यों खतरनाक है यह ट्रैक?

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 28 Sep 2026 12:13 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू की पार्वती घाटी में ट्रैकिंग पर गए दो लोग एक महीने से लापता हैं, जिससे इस क्षेत्र में ट्रैकिंग सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कुल्लू की पार्वती वैली के खतरनाक ट्रैक पर अब तक कई टूरिस्ट लापता हो चुके हैं। प्रतीकात्मक फोटो

कुल्लू की पार्वती वैली के खतरनाक ट्रैक पर अब तक कई टूरिस्ट लापता हो चुके हैं। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. कुल्लू की पार्वती घाटी में ट्रैकिंग पर गए दो लोग लापता।

  2. घाटी की दुर्गम खाइयां, घने जंगल और जानवर खतरनाक बनाते हैं।

  3. सुरक्षित ट्रैकिंग के लिए अनुभवी गाइड साथ रखें, अकेले न जाएं।

जागरण टीम, कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में जिला कुल्लू की पार्वती घाटी में ट्रैकिंग पर गए और फिर कभी नहीं लौटे। कुल्लू के विभिन्न ट्रैक पर गत वर्षों में सैकड़ों पर्यटक लापता हो चुके हैं। हो चुके हैं। हाल ही में अलग-अलग घटनाओं में लापता हुए दो लोगों का एक माह बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। ऊंचाई वाले दुर्गम क्षेत्रों में लगातार चलाए गए तलाशी अभियान के बावजूद दोनों के नहीं मिलने से घाटी में ट्रैकिंग और पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्यों खतरनाक है पार्वती घाटी

कुल्लू की पार्वती वैली में खाई और घाटियां हैं। चढ़ाई और उतराई वाले ट्रैक पर अचानक गहरी खाइयां पर्यटकों के लिए जोखिम बन जाती हैं। इसके अलावा यहां के घने जंगल भी पर्यटकों को भटकाने का काम करते हैं। इसके अलावा जंगलों में खूंखार जंगली जानवर भी हैं। अचानक इनसे आमना-सामना होने पर वह हमला कर सकते हैं। उफनते नदी-नाले भी जोखिम बढ़ाते हैं। बरसात के मौसम में यह ट्रैक और मुश्किल हो जाता है। 

सुरक्षित ट्रैकिंग के लिए क्या करें

पर्यटक सुरक्षित ट्रैकिंग के लिए यहां अकेले घूमने से परहेज करें। साथ में अनुभवी गाइड अवश्य रखें। गाइड के अनुसार ही ट्रैकिंग का शेड्यूल बनाएं व ट्रैक पर निकलें।

मेडिकल छात्र मलाणा की ओर निकला था ट्रैकिंग पर

झारखंड निवासी 24 वर्षीय मेडिकल छात्र सुकांत गुइन आठ अगस्त को मलाणा की ओर अकेले ट्रैकिंग पर निकले थे। इसके बाद उनका कोई पता नहीं चला। बचाव दलों ने करीब 3700 मीटर ऊंचे चंद्रखणी दर्रे सहित आसपास के दुर्गम क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा।

स्थानीय बचाव विशेषज्ञों के अनुसार आशंका है कि युवक किसी खड़ी ढलान से गिर गया हो अथवा जंगली जानवर का शिकार हुआ हो।

दिल्ली के नरेंद्र की लास्ट लोकेशन मिली थी मणिकर्ण में

दूसरी घटना में दिल्ली निवासी 32 वर्षीय नरेंद्र रावत 22 अगस्त को अचानक घर से निकलने के बाद लापता हो गए। 24 अगस्त को उनकी अंतिम मोबाइल लोकेशन मणिकर्ण में मिली थी। इसके बाद मोबाइल फोन बंद हो गया। परिवार का आरोप है कि हिमाचल पुलिस ने उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने और मोबाइल रिकॉर्ड की समीक्षा करने में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की।

सुकांत के पिता की सरकार से गुहार

सुकांत गुइन के पिता ने राज्य सरकार से कुल्लू के दुर्गम ट्रैकिंग रूटों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। उन्होंने अकेले ट्रैकिंग करने वालों के लिए अनिवार्य ट्रैकिंग प्रणाली लागू करने अथवा ऐसे क्षेत्रों में सोलो ट्रैकिंग पर रोक लगाने की मांग उठाई है।

पार्वती घाटी के चुनौतीपूर्ण ट्रैक

लगातार सामने आ रहे लापता होने के मामलों ने पार्वती घाटी के चुनौतीपूर्ण ट्रैकिंग मार्गों पर निगरानी और आपातकालीन बचाव व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इससे पहले भी यहां कई पर्यटक लापता हो चुके हैं। 

यह भी पढ़ें: Himachal Snowfall: लाहुल-स्पीति के काजा में सीजन का पहला हिमपात, टूरिस्ट के लिए जोखिमभरा हुआ सफर; एडवायजरी जारी