350 करोड़ से चकाचक होगा कुल्लू-मनाली फोरलेन, क्रिटिकल प्वाइंट पर टनल निर्माण होगा; विक्रमादित्य ने किया दौरा
कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर कुल्लू से मनाली तक लगभग 350 करोड़ रुपये के रिस्टोरेशन कार्य होंगे। एनएचएआई खतरनाक स्थलों पर टनल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर रहा है।

कुल्लू दौरे के दौरान पीडब्लयूडी मंत्री विक्रमादित्य सिंह। जागरण
HighLights
कुल्लू-मनाली फोरलेन पर 350 करोड़ के रिस्टोरेशन कार्य।
खतरनाक स्थलों पर एनएचएआई टनल निर्माण का प्रस्ताव।
मानसून क्षति रोकने को आईआईटी रोपड़ की राय।
संवाद सहयोगी, पतलीकूहल (कुल्लू)। कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर कुल्लू से मनाली तक लगभग 350 करोड़ रुपये के रिस्टोरेशन कार्य होंगे। एनएचएआई खतरनाक स्थल पर टनल निर्माण का प्रस्ताव तैयार कर रहा है, जो स्थायी समाधान होगा। पतलीकूहल में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि हिमाचल के फोरलेन क्षतिग्रस्त हिस्सों की बहाली जारी है। कुल्लू-मनाली के बीच 300 से 350 करोड़ रुपये के काम चल रहे हैं।
एनएचएआई प्रदेश में नेशन बिल्डिंग की महत्वपूर्ण संस्था है। शिमला से मटौर, कीरतपुर से मनाली और पठानकोट से मंडी तक फोरलेन का काम प्रगति पर है। 2023 और 2025 के मानसून में भारी नुकसान के बाद बहाली युद्ध स्तर पर जारी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी हिमाचल आकर मुख्यमंत्री के साथ नुकसान का जायजा ले चुके हैं।
ड्रेजिंग स्थायी समाधान नहीं
कुल्लू-मनाली सेक्शन में बार-बार मलबा और पत्थर गिरने से हाईवे बंद हो रहा है। केवल ड्रेजिंग स्थायी समाधान नहीं है। इसके लिए शिमला में जल्द बैठक होगी। इसमें लोक निर्माण विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी, एनएचएआई के आरओ, हाइड्रो प्रोजेक्ट और निजी हाइड्रो कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
मलबे को डायवर्ट करने का सिस्टम फ्लो बनेगा
ब्यास नदी के सहायक नालों से आने वाले मलबे को डायवर्ट करने का सिस्टम फ्लो बनाया जाएगा, ताकि नदी और हाईवे को कम से कम नुकसान हो। हाईवे बंद होने पर लोक निर्माण विभाग के संपर्क मार्ग इस्तेमाल करने पड़ते हैं। पिछली बार हाईवे बंद होने पर आइआइटी कमांद से मंडी तक यातायात लोक निर्माण विभाग की सड़क से निकाला गया। चेलचौक से पंडोह सेक्शन में भी सुधार किया गया।
क्रिटिकल प्वाइंट पर टनल का प्रस्ताव
एनएचएआई की प्रेजेंटेशन में क्रिटिकल प्वाइंटस पर टनल का प्रस्ताव अच्छी पहल है। गडकरी ने दिल्ली में माना था कि डीपीआर एसी कमरों में बैठकर बनाई जाती हैं और जमीन की टोपोग्राफी तथा मिट्टी की समस्याएं नहीं देखी जातीं।
अब आइआइटी रोपड़ को विशेषज्ञों की राय के लिए शामिल किया गया है, ताकि आगामी मानसून में नुकसान कम हो तथा पर्यटन और सेब सीजन में लोगों का माल समय पर मंडियों तक पहुंचे।
